प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में उत्तराखंड की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर राज्य की असली पहचान उसकी “आध्यात्मिक शक्ति” को बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पास इतनी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत है कि अगर राज्य ठान ले, तो वह कुछ ही वर्षों में खुद को “विश्व की आध्यात्मिक राजधानी” के रूप में स्थापित कर सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्रसिद्ध मंदिर, आश्रम, योग और ध्यान केंद्रों को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है, जिससे पूरी दुनिया को यहाँ की शक्ति और शांति का अनुभव हो सके
आध्यात्मिक पहचान का महत्वपीएम मोदी ने यह भी कहा कि उत्तराखंड सिर्फ भौगोलिक या सांस्कृतिक रूप से नहीं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा से पूरे भारत और विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है।दुनिया भर से लोग यहाँ योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और ध्यान के लिए आते हैं। इस कारण राज्य को ग्लोबल वेलनेस टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनाने की संभावना है
प्रमुख बातें प्रधानमंत्री के संबोधन सेउन्होंने कहा, “उत्तराखंड की असली पहचान उसकी आध्यात्मिक शक्ति है। यहाँ के मंदिर, आश्रम, योग व ध्यान केंद्र राज्य की आत्मा हैं।”राज्य ने पिछले 25 वर्षों में योग, आयुर्वेद, औषधीय पौधे, वेलनेस और पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।उनका सपना है कि हर विधानसभा क्षेत्र में योग केंद्र, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी आदि की संपूर्ण सुविधा विकसित हो, जिससे विदेशी पर्यटक भी आकर्षित हों
आर्थिक विकास में आध्यात्मिकता की भूमिकापीएम मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि उत्तराखंड के धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र, जैसे – गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, ज्योंतक, आदि कैलाश – हर साल लाखों श्रद्धालु और यात्रियों को आकर्षित करते हैं। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था में सीधा योगदान होता है
राज्य का वार्षिक बजट 25 वर्षों में ₹4,000 करोड़ से बढ़कर ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो गया है, जो विकास और आधारभूत संरचनाओं में सतत प्रगति का प्रमाण है