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वाराणसी से चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर देश को एक बड़ा तोहफा दिया है। वंदे भारत ट्रेनें भारत की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी निर्माण की सफलता का प्रतीक हैं, जो भारतीयों द्वारा, भारतीयों के लिए बनाई गई हैं। यह आधुनिक ट्रेनें भारत के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
वाराणसी से चलाई जाने वाली प्रमुख वंदे भारत ट्रेनों में बनारस-खजुराहो वंदे भारत शामिल है, जो पूर्वांचल और बुंदेलखंड के छोटे शहरों को जोड़कर पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी।प्रधान मंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि वंदे भारत ट्रेनें भारतीय रेलवे को बदलने का अभियान हैं और ये ट्रेनें भारत की तेज़ गति से विकास की दिशा में एक प्रमुख साधन हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया के विकसित देशों की प्रगति में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा योगदान होता है और भारत भी इसी मार्ग पर तेज़ी से बढ़ रहा है।
वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत ट्रेन के अलावा, फिरोजपुर-दिल्ली, लखनऊ-सहारनपुर, और एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत ट्रेनों का भी शुभारंभ हुआ है। कुल मिलाकर अब देश में 160 से ज्यादा वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं।
वंदे भारत ट्रेनों के शुभारंभ के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के बीच प्रतियोगिताएं आयोजित करने की पहल की, जिसमें बच्चों द्वारा विकसित भारत, सुरक्षित भारत जैसे विषयों पर चित्र और कविताएं प्रस्तुत की गईं।
उन्होंने वाराणसी के बच्चों और उनके शिक्षकों के समर्थन की भी सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने वाराणसी की तेज़ विकास गति को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया ताकि यह शहर विश्व स्तर की ऊर्जा, उत्साह और आनंद का केंद्र बने।
ये वंदे भारत ट्रेनें न केवल यात्रा के समय को कम करेंगी, बल्कि यात्रियों को उच्चतम स्तर की सुविधाएं और सुरक्षा भी प्रदान करेंगी। वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत ट्रेन से मार्ग के बीच के विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थल बेहतर जुड़ेंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को भी बल मिलेगा।
कुल मिलाकर, यह कदम वाराणसी और देश के लिए गर्व का विषय है और आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करता है।स्रोत: प्रधानमंत्री के वाराणसी दौरे और वंदे भारत ट्रेनों के शुभारंभ की खबरें