प्रयागराज श्रृंगवेरपुर धाम धरना
प्रयागराज जिले के श्रृंगवेरपुर धाम में एक बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन देखने को मिला, जहां योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद अपने समर्थकों के साथ जीटी रोड (नेशनल हाईवे) पर धरने पर बैठ गए। उनकी मुख्य मांग है कि श्रृंगवेरपुर धाम के निषादराज किले के पास बनी मस्जिद को तत्काल हटाया जाए, जिसे वे अवैध कब्जा बताते हैं।
धरने का कारण और मांगें
संजय निषाद ने आरोप लगाया कि यह मस्जिद अवैध रूप से बनाई गई है और इससे निषादराज के किले का ऐतिहासिक अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उन्होंने कहा कि श्रृंगवेरपुर धाम भगवान राम और निषादराज गुह की मित्रता का पवित्र स्थल है, जहां योगी सरकार ने पर्यटन सर्किट विकसित किया है, भव्य प्रतिमाएं स्थापित की हैं। लेकिन किले के पास मस्जिद का निर्माण निषाद समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
इसके अलावा उन्होंने अवैध अतिक्रमण और अवैध खनन रोकने की भी मांग की। निषाद ने दावा किया कि पुजारी की हत्या कर जमीन पर कब्जा किया गया और मस्जिद बनाई गई। वे तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
धरने का असर: हाईवे पर लंबा जाम
*धरने के कारण प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जाम 5 किलोमीटर तक फैल गया। एंबुलेंस, स्कूली बच्चों के वाहन और आम यात्रियों को भारी परेशानी हुई। यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
धरने में निषाद पार्टी के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, पदाधिकारी और
निषाद समाज के लोग शामिल हुए, जो पार्टी के झंडे लिए मौजूद रहे।
पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी
धरने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स औ
र स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंच गए। नवाबगंज थाना क्षेत्र की
पुलिस ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। अधिकारी मंत्री को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन
संजय निषाद बिना ठोस कार्रवाई के हाईवे खाली करने को तैयार नहीं हैं।
यह पहला मौका नहीं है; संजय निषाद पहले भी
मस्जिद हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। 2023 से यह मुद्दा उठ रहा है,
जहां पार्टी ने इसे अवैध निर्माण बताते हुए मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार को पत्र लिखा था।
राजनीतिक संदर्भ
योगी सरकार में मंत्री होने के बावजूद संजय निषाद ने अपनी ही सरकार से मांग की,
जो निषाद समाज के मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ दर्शाता है। यह प्रदर्शन
2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है, जहां निषाद वोट बैंक महत्वपूर्ण है।
स्थानीय लोग और यात्री जाम से परेशान हैं, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
प्रशासन जांच कर रहा है और जल्द समाधान की उम्मीद है।
