PM Modi Uzbekistan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रिश्तों का एक बेहद भावनात्मक और सांस्कृतिक पहलू सामने आया। ताशकंद स्थित ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्षों पहले लिखी गई कविताओं का हिंदी और उज्बेक भाषा में पाठ किया। अपनी कविताओं को विदेशी छात्रों की आवाज में सुनकर प्रधानमंत्री मोदी भावुक नजर आए। उन्होंने छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं होने के बावजूद उन्होंने कविताओं में मौजूद भावनाओं को उसी तरह व्यक्त किया, जैसे वे भाव उन्हें कविता लिखते समय महसूस हुए थे।
यह मुलाकात केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संबंधों की एक खूबसूरत तस्वीर बन गई। छात्रों की प्रस्तुति ने वहां मौजूद लोगों का भी ध्यान खींचा।
ताशकंद में छात्रों ने किया खास स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय उज्बेकिस्तान दौरे के दौरान ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के महात्मा गांधी सेंटर का दौरा किया। यहां उन्होंने छात्रों, इंडोलॉजिस्ट और भारत से जुड़े विषयों का अध्ययन करने वाले शिक्षाविदों से बातचीत की।
इसी दौरान उज्बेक छात्रों ने पीएम मोदी की लिखी कविताएं प्रस्तुत कीं। छात्रों ने कविता को केवल हिंदी में पढ़ा ही नहीं, बल्कि उसके भाव और अर्थ को उज्बेक भाषा में भी प्रस्तुत किया। इससे कार्यक्रम में मौजूद लोगों के सामने दोनों देशों के बीच भाषा और संस्कृति के जुड़ाव की एक अलग तस्वीर सामने आई।
पीएम मोदी की पुरानी कविताएं सुनकर भावुक हुए प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों की प्रस्तुति के बाद इस अनुभव को अपने लिए भावुक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि ये कविताएं उन्होंने बहुत पहले लिखी थीं और वर्षों बाद उन्हें युवा छात्रों की आवाज में सुनना उनके लिए विशेष अनुभव था।
पीएम मोदी के मुताबिक सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि छात्रों की मातृभाषा हिंदी नहीं होने के बावजूद उन्होंने कविताओं की भावनाओं को उसी तरह समझकर प्रस्तुत किया।
उन्होंने इस बात को भाषा से आगे का अनुभव बताया। उनके अनुसार किसी भाषा की भावनाओं को उसी गहराई से व्यक्त करना तभी संभव होता है, जब व्यक्ति उस भाषा और उसकी संवेदना में पूरी तरह डूब जाए।
तीन कविताओं की हुई प्रस्तुति
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी की तीन कविताओं को प्रस्तुत किया। इनमें ‘अभी तो सूरज उगा है’, ‘नए भारत के नए संकल्प’ और ‘मानवता को कहीं न लग जाए दाग’ शामिल थीं।
इन कविताओं को अलग-अलग छात्रों ने हिंदी और उज्बेक भाषा में प्रस्तुत किया। एक छात्र ने कविता का हिंदी पाठ किया तो दूसरे छात्र ने उसका उज्बेक रूप प्रस्तुत किया।
इस पूरी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दे दिया और भारत की हिंदी साहित्य परंपरा को उज्बेकिस्तान के युवाओं से जोड़ने का काम किया।
हिंदी मातृभाषा नहीं, फिर भी भावों को समझा
इस पूरे कार्यक्रम की सबसे खास बात भाषा रही। उज्बेकिस्तान के इन छात्रों के लिए हिंदी मातृभाषा नहीं है, लेकिन उन्होंने हिंदी कविताओं के उच्चारण के साथ उनके भावों को भी समझने और व्यक्त करने की कोशिश की।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसी पहलू की विशेष रूप से सराहना की। उनके मुताबिक छात्रों ने कविता में मौजूद भावनाओं को बेहद सटीक तरीके से प्रस्तुत किया।
यह घटना इस बात का उदाहरण भी है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि वह अलग-अलग देशों और समाजों के बीच सांस्कृतिक पुल का काम कर सकती है।
उज्बेकिस्तान में भारत के प्रति गहरा आकर्षण
उज्बेकिस्तान और भारत के बीच सांस्कृतिक संबंध नए नहीं हैं। भारतीय फिल्मों, संगीत और साहित्य के प्रति वहां लंबे समय से लोगों की रुचि रही है। खासकर हिंदी फिल्मों और गीतों ने वहां भारतीय संस्कृति की पहचान बनाने में भूमिका निभाई है।
अब इसी सांस्कृतिक जुड़ाव का एक नया रूप ताशकंद के विश्वविद्यालय में देखने को मिला, जहां छात्रों ने हिंदी सीखने के साथ भारतीय साहित्य और प्रधानमंत्री मोदी की कविताओं में भी रुचि दिखाई।
एक इंडोलॉजिस्ट ने भी कार्यक्रम के दौरान भारत के प्रति उज्बेक लोगों के लगाव का उल्लेख किया और भारतीय कला, साहित्य तथा परंपराओं में स्थानीय रुचि पर बात की।
महात्मा गांधी और भारतीय संस्कृति पर भी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की महात्मा गांधी सेंटर की यात्रा के दौरान केवल कविताओं पर चर्चा नहीं हुई। भारत के इतिहास, संस्कृति और महात्मा गांधी के विचारों को लेकर भी छात्रों और विशेषज्ञों से बातचीत हुई।
विश्वविद्यालय में भारत संबंधी अध्ययन के लिए एक मजबूत अकादमिक वातावरण मौजूद है। छात्रों में भारतीय भाषाओं और संस्कृति को समझने की रुचि को भारत-उज्बेकिस्तान के लोगों के बीच संबंध मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तमिल संस्कृति और तिरुक्कुरल का भी जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान केवल हिंदी तक सीमित न रहते हुए भारतीय भाषाओं की व्यापक विविधता पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने तमिल साहित्य और प्राचीन तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल का उल्लेख किया।
पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद किया जाए, जिससे उज्बेकिस्तान के लोग भारतीय दर्शन और साहित्य की इस महत्वपूर्ण परंपरा को और करीब से समझ सकें। इस सुझाव को वहां मौजूद लोगों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति
उज्बेकिस्तान दौरे के दौरान हिंदी भाषा के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्ति की घोषणा भी की गई। इसका उद्देश्य उज्बेक छात्रों को हिंदी की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना और दोनों देशों के शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करना है।
यह पहल उस व्यापक सांस्कृतिक संबंध का हिस्सा है जिसमें दोनों देशों के बीच भाषा,
शिक्षा, साहित्य और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा क्यों रहा खास?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा।
राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ उनकी बातचीत में व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज,
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, UPI, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, शिक्षा,
पर्यटन और अंतरिक्ष सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।
दौरे के दौरान पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान
‘ऑर्डर ऑफ ओलिय दराजाली दोस्तलिक’ से भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के
संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया।
कविता से कूटनीति तक, दिखी रिश्तों की नई तस्वीर
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आमतौर पर राष्ट्राध्यक्षों की बैठकें व्यापार, सुरक्षा और
रणनीतिक मुद्दों पर केंद्रित होती हैं। लेकिन ताशकंद में छात्रों द्वारा हिंदी कविताओं की प्रस्तुति ने
इस राजनयिक यात्रा को एक मानवीय और सांस्कृतिक आयाम दे दिया।
एक प्रधानमंत्री की वर्षों पुरानी कविताओं को किसी दूसरे देश के युवा हिंदी में पढ़ें और
उसी कविता का भाव अपनी भाषा में भी समझाएं—यह दोनों
देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संवाद की एक अनोखी मिसाल है।
यह घटना यह भी दिखाती है कि भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ केवल बॉलीवुड या योग तक सीमित नहीं है।
हिंदी भाषा, साहित्य, भारतीय दर्शन और परंपराएं भी विदेशों में
भारत के प्रति रुचि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में युवाओं की भूमिका
भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने में युवा पीढ़ी की
भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं और संस्कृति का अध्ययन करने वाले
छात्र भविष्य में दोनों देशों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक संपर्कों के माध्यम बन सकते हैं।
ताशकंद में हुई यह प्रस्तुति इसी दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है।
खास बात यह है कि इसमें सरकारों के साथ-साथ युवाओं और अकादमिक संस्थानों की भूमिका भी दिखाई दी।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे में छात्रों द्वारा उनकी कविताओं का हिंदी और
उज्बेक भाषा में पाठ एक ऐसा क्षण बन गया, जिसने पूरे कार्यक्रम को भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप दे दिया।
हिंदी मातृभाषा नहीं होने के बावजूद उज्बेक छात्रों ने कविताओं के भावों को जिस तरह प्रस्तुत किया,
उसकी पीएम मोदी ने विशेष रूप से सराहना की।
इस मुलाकात से यह भी सामने आया कि भारत और उज्बेकिस्तान के
संबंध केवल व्यापार और रणनीतिक सहयोग तक
सीमित नहीं हैं। भाषा, साहित्य, शिक्षा और संस्कृति भी दोनों देशों को करीब ला रहे हैं।
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FAQ: PM Modi Uzbekistan Visit और हिंदी कविता
1. उज्बेक छात्रों ने पीएम मोदी के सामने क्या किया?
उज्बेक छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्षों पहले लिखी गई कविताओं का हिंदी और उज्बेक भाषा में पाठ किया।
2. पीएम मोदी भावुक क्यों हुए?
पीएम मोदी ने बताया कि उनकी कविताएं बहुत पहले लिखी गई थीं और उन्हें
उज्बेक छात्रों की आवाज में सुनना उनके लिए भावुक अनुभव रहा। उन्होंने छात्रों द्वारा
कविता के भावों को सही तरीके से व्यक्त करने की सराहना की।
3. छात्रों ने कौन-कौन सी कविताएं सुनाईं?
छात्रों ने ‘अभी तो सूरज उगा है’, ‘नए भारत के नए संकल्प’ और ‘मानवता को
कहीं न लग जाए दाग’ जैसी कविताएं प्रस्तुत कीं।
4. क्या उज्बेक छात्रों की मातृभाषा हिंदी है?
नहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से कहा कि हिंदी छात्रों की मातृभाषा नहीं है,
इसके बावजूद उन्होंने कविताओं के भावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
5. पीएम मोदी ने तिरुक्कुरल के बारे में क्या कहा?
पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि प्राचीन तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में
अनुवाद किया जा सकता है, ताकि भारतीय साहित्य और दर्शन को उज्बेकिस्तान में और समझा जा सके।
6. क्या उज्बेकिस्तान में हिंदी की पढ़ाई होती है?
हां। ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में हिंदी सहित भारत से जुड़े
विषयों का अध्ययन किया जाता है और वहां भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले छात्र मौजूद हैं।
7. हिंदी को बढ़ावा देने के लिए क्या पहल हुई?
दौरे के दौरान उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के अध्ययन को समर्थन देने के लिए
लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्ति की घोषणा की गई।
8. पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान में कौन सा सम्मान मिला?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ऑर्डर ऑफ ‘ओलिय दराजाली दोस्तलिक’ से सम्मानित किया गया।
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