प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
CSPOC 2026: वैश्विक मंच पर भारत की लोकतांत्रिक ताकत
15 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रिजाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य अतिथि के रूप में 42 देशों के संसदीय पदाधिकारियों को संबोधित किया। इस सम्मेलन का विषय ‘वैश्विक चुनौतियों में संसदीय लोकतंत्र की भूमिका’ था, जिसमें मोदी ने भारत के लोकतंत्र की मजबूत बुनियाद पर जोर देते हुए कहा, “हमारे लोकतंत्र की बुनियाद ठोस है, जो सदियों की सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक मूल्यों पर टिकी है।” यह भाषण न केवल भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करता है, बल्कि कॉमनवेल्थ देशों के बीच एकता का संदेश भी देता है।
सम्मेलन का महत्व और पृष्ठभूमि
CSPOC एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकर और प्रिजाइडिंग ऑफिसर संसदीय प्रक्रियाओं, लोकतंत्र की चुनौतियों और सहयोग पर चर्चा करते हैं। 28वां संस्करण भारत में आयोजित होने से विशेष महत्व रखता है, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। सम्मेलन में ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड सहित 42 देशों के प्रतिनिधि शामिल थे।
मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि वैश्विक संकटों जैसे जलवायु परिवर्तन, महामारी और आर्थिक असमानता से निपटने में लोकतंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत के लोकतंत्र को ‘जन-केंद्रित’ बताते हुए कहा कि हमारी संविधान सभा ने ऐसी बुनियाद रखी जो विविधता में एकता को मजबूत करती है।
मोदी के भाषण की मुख्य बातें
प्रधानमंत्री ने अपने 30 मिनट के भाषण में कई अहम मुद्दों पर प्रकाश डाला:
- लोकतंत्र की मजबूती: मोदी ने कहा, “भारत का लोकतंत्र न केवल ठोस है, बल्कि लचीला भी। हमने महामारी के दौरान भी चुनाव कराए और डिजिटल माध्यमों से संसदीय कार्यवाही जारी रखी।”
- वैश्विक सहयोग: उन्होंने कॉमनवेल्थ देशों से अपील की कि वे संसदीय सहयोग बढ़ाएं, विशेषकर विकासशील देशों के लिए। G20 की अध्यक्षता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ का मंत्र दिया।
- महिला सशक्तिकरण: मोदी ने भारत की महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख किया और कहा कि महिलाओं की संसदीय भागीदारी से लोकतंत्र मजबूत होता है।
- डिजिटल लोकतंत्र: उन्होंने ई-पार्लियामेंट और डिजिटल इंडिया का उदाहरण देकर कहा कि तकनीक लोकतंत्र को सशक्त बना रही है।
उन्होंने सम्मेलन को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से जोड़ा और कहा कि कॉमनवेल्थ परिवार वैश्विक शांति का प्रतीक है।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं और सम्मेलन के अन्य हाइलाइट्स
सम्मेलन में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के स्पीकर सर
लिंडसे होयले ने मोदी के भाषण की सराहना की और कहा कि
भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए प्रेरणा है।
ऑस्ट्रेलियाई स्पीकर मिल्टन डिक ने भी भारत की डिजिटल प्रगति की तारीफ की।
सम्मेलन में पैनल डिस्कशन हुए, जहां जलवायु परिवर्तन और संसदीय नैतिकता पर बहस हुई।
यह सम्मेलन भारत की विदेश नीति के लिए मील का पत्थर है, क्योंकि
यह G20 और SCO के बाद एक और वैश्विक मंच है जहां भारत ने अपनी लोकतांत्रिक ताकत दिखाई।
ठोस बुनियाद से मजबूत भविष्य
पीएम मोदी का CSPOC 2026 में भाषण भारत के लोकतंत्र की वैश्विक छवि को और चमकाता है।
यह दिखाता है कि हमारी बुनियाद न केवल ठोस है, बल्कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम भी।
ऐसे सम्मेलनों से अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ेगा और
लोकतंत्र मजबूत होगा। आइए हम सब मिलकर भारत के लोकतंत्र को और सशक्त बनाएं।
