📢 फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ चैनल की खास रिपोर्ट
सर्विस बुक गुम होने पर पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता – हाईकोर्ट
लखनऊ से बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सरकारी कर्मचारियों के हक में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी विभाग की लापरवाही के चलते कर्मचारी की सर्विस रिकॉर्ड (Service Book) गुम हो जाती है या उसका ठीक से संरक्षण नहीं होता, तो इसका खामियाज़ा कर्मचारी को नहीं भुगतना पड़ेगा।
✒ कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश
हाईकोर्ट ने कहा कि:
सेवा रिकॉर्ड को तैयार करना और सुरक्षित रखना विभाग की जिम्मेदारी है।
यदि विभाग इस जिम्मेदारी में असफल रहता है तो कर्मचारी को न तो नियमितीकरण से वंचित किया जा सकता है और न ही पेंशन लाभों से।
विभाग अपनी गलती का फायदा उठाकर किसी कर्मचारी को दंडित नहीं कर सकता।
✒ मामला क्या था?
यह फैसला न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने सुनाया।
सत्य प्रकाश श्रीवास्तव और अन्य की दो याचिकाओं को स्वीकार करते हुए अदालत ने यह निर्णय दिया।
याचिकाकर्ताओं की सर्विस बुक गुम हो जाने के बाद उन्हें समीक्षा अधिकारी के रूप में नियमितीकरण और सेवा निवृत्ति लाभ से वंचित कर दिया गया था।
राज्य के प्रशासनिक विभाग ने वर्ष 2000 से पूर्ववर्ती प्रभाव से सेवा को नियमित करने और पेंशन लाभ देने से मना कर दिया था।
✒ हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के दावों को खारिज करने वाले आदेशों को रद्द कर दिया और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि –
याचिकाकर्ताओं की सेवा को नियमित माना जाए।
उन्हें सभी पेंशन संबंधी लाभ तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।
✒ विवादित आदेश
29 जुलाई 2014 और 14 अगस्त 2020 को पारित आदेशों को याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी थी।
उन्हीं आदेशों के तहत उनके लाभ संबंधी आवेदन खारिज कर दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने अब इन आदेशों को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
✒ निचोड़
हाईकोर्ट का यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए बेहद राहत भरा है। यह स्पष्ट संदेश है कि विभागीय लापरवाही का बोझ कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता। पेंशन और सेवा लाभ कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है, जिसे किसी भी हालत में छीना नहीं जा सकता।
👉 फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ चैनल का कहना है कि यह फैसला न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के कर्मचारियों के लिए मिसाल बनेगा।
