पौष पूर्णिमा तिथि 2 जनवरी 2026 को शाम 6:53 बजे शुरू होकर 3 जनवरी दोपहर 3:32 बजे समाप्त होगी, इसलिए उदय तिथि के अनुसार 3 जनवरी को व्रत रखें। चंद्र उदय 3 जनवरी शाम करीब 6:11 बजे होगा, जबकि ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 से 6:20 तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:46 तक शुभ रहेगा। इस दिन प्रयागराज, हरिद्वार या काशी में गंगा स्नान विशेष फलदायी माना जाता है।
धार्मिक महत्व
पूर्णिमा को चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है, जो मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। पौष पूर्णिमा शाकंभरी पूर्णिमा के नाम से भी जानी जाती है, जहां देवी जगदंबा ने भक्तों को हरा भोजन प्रदान किया था। इससे माघ स्नान का प्रारंभ माना जाता है तथा पितृ तर्पण और दान से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।
पूजा विधि और व्रत नियम
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें, फिर सत्यनारायण भगवान की पूजा करें। व्रत फलाहार के साथ रखें, रात को चंद्रोदय पर चंद्रमा को दूध-चावल अर्पित करें। दान में तिल, गुड़, कंबल, अन्न या वस्त्र दें। घर पर पूजा के बाद पितरों का तर्पण करें, इससे कष्ट निवारण होता है।
दान-पुण्य के उपाय
तिल, गुड़ और कंबल का दान ब्राह्मणों को करें। गंगा या पवित्र नदी स्नान के बाद सूर्य-चंद्र पूजन। सत्यनारायण कथा सुनें, जप-ध्यान से मानसिक बल बढ़ाएं।
पौष पूर्णिमा पर ये उपाय जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाते हैं।
यह दिन नए साल की शुरुआत में सकारात्मक ऊर्जा भरने का अवसर है।
गंगा स्नान से पाप नाश और पुण्य प्राप्ति होती है।
सत्यनारायण पूजा से परिवार सुख और धन लाभ मिलता है।
यह पूर्णिमा माघ स्नान की शुरुआत भी है, जो कल्पवास और तप का प्रतीक है।
पितृ तर्पण से पूर्वजों को शांति मिलती है। दान से पुण्य बढ़ता है।
यदि आप व्रत रख रहे हैं, तो मुहूर्त का ध्यान रखें। शाम चंद्रोदय पर पूजा विशेष फलदायी है।
नए साल में यह पूर्णिमा शुभ संकेत देती है।
पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान और पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं
