गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज (RD) में एक बार फिर मरीज माफिया की सक्रियता ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बिचौलियों के नेटवर्क ने एक नवजात की जान ले ली। सरकारी अस्पताल में भर्ती न मिलने के बाद परिजनों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई।
कैसे हुआ पूरा मामला
बताया जा रहा है कि तीन दिन पहले एक नवजात को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में इलाज के लिए लाया गया था। लेकिन परिजनों को यह कहकर लौटा दिया गया कि अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं है।
इसी मौके का फायदा उठाकर सक्रिय बिचौलियों ने परिजनों को अपने जाल में फंसा लिया और उन्हें कॉलेज रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए राजी कर लिया।
बिचौलियों का नेटवर्क
स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल परिसर के आसपास बिचौलियों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है।
- मरीजों और परिजनों को टारगेट करना
- सरकारी अस्पताल की कमी का फायदा उठाना
- निजी अस्पतालों में भेजकर कमीशन लेना
यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के बावजूद पूरी तरह बंद नहीं हो पाया है।
निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप
परिजनों ने निजी अस्पताल पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
- इलाज के नाम पर भारी भरकम बिल बनाया गया
- 70 हजार रुपये अतिरिक्त जमा करने का दबाव डाला गया
- भुगतान न करने पर शव देने में भी आनाकानी की गई
हालांकि अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक इस मामले में स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह कोई पहला मामला नहीं है।
- 15 मार्च को भी एंबुलेंस के जरिए मरीज को निजी अस्पताल ले जाते समय पकड़ा गया था
- पहले भी कई बार मरीज माफिया के सक्रिय होने की शिकायतें मिल चुकी हैं
इसके बावजूद इस नेटवर्क पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है।
प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।
- क्या सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं हैं
- बिचौलियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही
- मरीजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी
ये सवाल अब और भी गंभीर हो गए हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि
- अस्पताल परिसरों में निगरानी बढ़ानी होगी
- बिचौलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है
- मरीजों और परिजनों को जागरूक करना होगा
तभी इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
गोरखपुर का यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करता है। जब इलाज के नाम पर माफिया सक्रिय हो जाएं, तो सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है।
जरूरत है कि प्रशासन इस पर कड़ी कार्रवाई करे और मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।
