एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट की शुरुआत: ड्रोन सर्वे से तेजी आईपानीपत गोरखपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण अब जमीन पर उतर चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ड्रोन सर्वे की शुरुआत कर दी है, जो इस महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट को नई गति देगा। यह 350 किलोमीटर लंबा 6-लेन एक्सप्रेसवे हरियाणा के पानीपत से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तक बनेगा। कुल लागत करीब 5700 करोड़ रुपये आंकी गई है। ड्रोन तकनीक से सर्वे में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी, जिससे भूमि अधिग्रहण में देरी नहीं होगी। योगी आदित्यनाथ सरकार की इस पहल से पूर्वांचल के विकास को बल मिलेगा।यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़कर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को मजबूत करेगा।
ड्रोन सर्वे के जरिए रूट मैपिंग, ऊंचाई माप और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। सर्वे कार्य पानीपत जिले से शुरू हो चुका है और अगले कुछ महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। NHAI अधिकारियों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 2028 तक चालू हो सकता है। इससे दिल्ली से गोरखपुर की दूरी 8 घंटे से घटकर मात्र 5 घंटे रह जाएगी।
यूपी-हरियाणा के 22 जिले जुड़ेंगे: आर्थिक क्रांति का द्वार खुलेगा
पानीपत गोरखपुर एक्सप्रेसवे यूपी और हरियाणा के कुल 22 जिलों को जोड़ेगा। हरियाणा में पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र और कैथल जैसे जिले शामिल होंगे, जबकि उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, आजमगढ़ और गोरखपुर प्रमुख हैं। अन्य जिलों में बरेली, बदायूं, लखीमपुर खीरी, उन्नाव, सुल्तानपुर आदि शामिल हैं।
इस एक्सप्रेसवे से इन जिलों में औद्योगिक हब विकसित होंगे। कृषि उत्पादों का परिवहन आसान होगा, खासकर गन्ना, गेहूं और सब्जियों का। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि यह अयोध्या, गोरखपुर के मंदिरों और पूर्वांचल के धार्मिक स्थलों को जोड़ेगा। रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे। स्थानीय व्यापारियों को दिल्ली-एनसीआर मार्केट से सीधी पहुंच मिलेगी। योगी सरकार का यह प्रोजेक्ट पूर्वांचल को दिल्ली के आर्थिक चक्र से जोड़ने का बड़ा प्रयास है।
मुआवजा विवाद: सरकारी जमीन पर प्रोजेक्ट, निजी मालिकों को राहत नहीं
एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खबर यह है कि अधिकांश रूट सरकारी जमीन पर बनेगा, इसलिए निजी जमीन मालिकों को मुआवजा नहीं मिलेगा। NHAI के सर्वे में 80% से ज्यादा भूमि सरकारी वन, तहसील और ग्राम सभा की पाई गई है। इससे प्रोजेक्ट की लागत 20% तक कम हो जाएगी और कानूनी विवाद टलेंगे।हालांकि, जिन निजी जमीनों पर कब्जा होगा, वहां नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत 4 गुना मुआवजा और आवास सुविधा का प्रावधान है। लेकिन सरकारी जमीन वाले क्षेत्रों में किसानों को कोई राहत नहीं। पूर्वांचल के किसान संगठनों ने इसका स्वागत किया है, लेकिन कुछ ने मुआवजा नीति की मांग की है। NHAI ने स्पष्ट किया कि ड्रोन सर्वे से सटीक डाटा मिलेगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।
ड्रोन सर्वे की तकनीक: आधुनिकता से तेज प्रगति
ड्रोन सर्वे में हाई-रेजोल्यूशन कैमरा और LiDAR सेंसर का उपयोग हो रहा है। इससे 3D मैपिंग संभव हो रही है। एक ड्रोन 100 एकड़ क्षेत्र को 30 मिनट में कवर कर लेता है। पानीपत से गोरखपुर तक का पूरा रूट अब डिजिटल रूप से मैप हो चुका है। पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के बाद निर्माण शुरू होगा।यह तकनीक पारंपरिक सर्वे से 70% तेज है। गलतियों की गुंजाइश न के बराबर। NHAI ने 10 ड्रोन टीम्स तैनात की हैं। सर्वे रिपोर्ट जल्द केंद्रीय मंत्रिमंडल को भेजी जाएगी।
लाभ और भविष्य की संभावनाएं
पानीपत गोरखपुर एक्सप्रेसवे से ट्रैफिक जाम खत्म होगा। ईंधन बचत से 1000 करोड़ सालाना की बचत। लॉजिस्टिक्स कॉस्ट 30% कम। निवेशकों को आकर्षित करेगा। गोरखपुर एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। योगी सरकार के 25 एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में यह प्रमुख है।