नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025: अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर केसरिया ध्वज फहराने के एक दिन बाद पाकिस्तान ने फिर से भारत को निशाना बनाया। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित भव्य ध्वजारोहण समारोह को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने ‘इस्लामोफोबिया’ और ‘मुस्लिम विरासत के विनाश’ का प्रतीक बताया। मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से हस्तक्षेप की अपील जारी की, जिसे भारत ने ‘प्रोपगैंडा’ करार दिया। यह घटना न केवल बाबरी मस्जिद विवाद को कुरेदती है, बल्कि दोनों देशों के तनावपूर्ण संबंधों को नई ऊंचाई देती है।
अयोध्या में क्या हुआ? ध्वजारोहण का ऐतिहासिक क्षण
25 नवंबर को विवाह पंचमी के शुभ मुहूर्त पर पीएम मोदी ने राम जन्मभूमि मंदिर के 191 फुट ऊंचे शिखर पर ‘धर्म ध्वज’ फहराया। यह ध्वज सूर्य चिह्न, ‘ओम’ और कोविदार वृक्ष से युक्त केसरिया पताका है, जो भगवान राम की वीरता और राम राज्य का प्रतीक है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ समेत हजारों भक्तों की मौजूदगी में यह समारोह मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का उत्सव था। पीएम मोदी ने कहा, “यह ध्वज सदियों की पीड़ा को शांत करने वाला है। आज पूरा भारत और विश्व राममय हो गया।” सुप्रीम कोर्ट के 2019 फैसले के बाद 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह तीसरा बड़ा पड़ाव था।
पाकिस्तान का बयान: इस्लामोफोबिया का नया बहाना
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रेस रिलीज जारी की। बयान में कहा गया, “अयोध्या में बाबरी मस्जिद पर राम मंदिर का निर्माण और ध्वजारोहण भारत में बढ़ते इस्लामोफोबिया का प्रमाण है। बाबरी मस्जिद सदियों पुरानी ऐतिहासिक इबादतगाह थी, जिसे 1992 में ध्वस्त किया गया।” मंत्रालय ने आरोप लगाया कि हिंदुत्व विचारधारा के तहत मुस्लिम सांस्कृतिक विरासत को मिटाया जा रहा है। उन्होंने यूएन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि भारत में अल्पसंख्यकों पर भेदभाव, हेट स्पीच और हमलों की जांच हो। “भारत को मस्जिदों और मुस्लिम धरोहर की रक्षा करनी चाहिए,” बयान में जोर दिया गया। पाकिस्तानी मीडिया ने इसे ‘भारत का धार्मिक अतिवाद’ बताकर प्रमुखता दी।
पाकिस्तान का दोहरा चरित्र: खुद के घर में अल्पसंख्यक दमन
पाकिस्तान की यह ‘ड्रामेबाजी’ उसके आंतरिक हालात पर सवाल खड़ी करती है। वहां हिंदू, सिख और ईसाई अल्पसंख्यकों की स्थिति दयनीय है। शारदा पीठ मंदिर (पाक अधिकृत कश्मीर) और कराची का जगन्नाथ मंदिर सरकारी उपेक्षा से खंडहर बन चुके हैं।
हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण, मंदिरों पर कब्जे और हमलों की खबरें रोज आती हैं।
हाल ही में अफगानिस्तान में पाकिस्तान पर 9 बच्चों की हत्या का आरोप लगा। विशेषज्ञ कहते हैं,
पाकिस्तान भारत को बदनाम करने के लिए धार्मिक मुद्दों का दुरुपयोग करता है, जबकि खुद आतंकवाद
और अल्पसंख्यक दमन से जूझ रहा है।
भारत का पलटवार: आंतरिक मामला, प्रोपगैंडा बंद करो
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के बयान को खारिज करते हुए कहा, “यह भारत का आंतरिक मामला है,
जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सुलझ चुका। पाकिस्तान अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए कीचड़ उछालता है।
” प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने जोड़ा, “जो देश आतंकवाद निर्यात करता है, उसे भारत के लोकतंत्र पर बोलने का हक नहीं।
” अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस भारत की छवि प्रभावित कर सकती है,
लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी पक्षों के अधिकार सुरक्षित रखता है।