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भारत के हिंदू श्रद्धालुओं को वाघा बॉर्डर पर रोका और वापस लौटा दिया, जिससे देशभर में आक्रोश और नाराजगी है यह मामला 5 नवंबर 2025 को उस समय सामने आया जब दिल्ली, लखनऊ तथा पंजाब के नवांशहर से जुड़े लगभग 14 हिंदू तीर्थयात्री, जो सिख जत्थे के साथ ननकाना साहिब (पाकिस्तान में गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान) जा रहे थे, उन्हें पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा बॉर्डर पर रोक दिया गया
भारत सरकार ने कुल 2,100 तीर्थयात्रियों को गुरु नानक जयंती के मौके पर पाकिस्तान यात्रा की अनुमति दी थी, जिसमें ज्यादातर सिख तीर्थयात्री थे. लगभग 1,900 लोग वाघा बॉर्डर पार कर पाए,
लेकिन 14 हिंदुओं को ‘सिख न होने’ के आधार पर रोक दिया गया और कहा गया, तुम हिंदू हो, सिख जत्थे के साथ नहीं जा सकते”ये सभी हिंदू तीर्थयात्री पहले पाकिस्तानी नागरिक थे, जो बाद में भारतीय नागरिक बन गए
पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका रिकॉर्ड केवल सिख श्रद्धालुओं के लिए है, हिंदू श्रद्धालुओं को अनुमति नहीं दी जा सकती.रिपोर्ट्स में ये भी सामने आया कि कुछ हिंदू भक्तों से कहा गया, “वापस जाओ अपने मंदिर में,” जिससे उन्हें अपमानित महसूस हुआ
कई श्रद्धालु वर्षों से ननकाना साहिब जाकर गुरु नानक देव का प्रकाश पर्व मनाना चाहते थे, लेकिन उनके धर्म के आधार पर उन्हें अपमानजनक तरीके से लौटा दिया गया. इससे धार्मिक स्वतंत्रता और भारत-पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर फिर प्रश्नचिह्न लगा
देशभर के तमाम धार्मिक संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे पाकिस्तान की तिरछी धार्मिक नीति बताया