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शत्रुघ्न सिन्हा का स्पीच (रूपरेखा)”दोस्तों, मुद्दा बहुत गंभीर है। देश के एक बड़े नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को खुलेआम जान से मारने की धमकी देना, वह भी नेशनल टेलीविजन पर, लोकतंत्र और सभ्य समाज दोनों के लिए अपमानजनक है। एक समय था जब असहमति का आदर किया जाता था,
आज उसे दबाने के लिए हिंसा की भाषा बोली जा रही है। क्या इस तरह से किसी भी लोकतंत्र का भला हो सकता है?हमारे देश ने पहले ही दो महान नेताओं – इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को राजनीतिक हिंसा में खो दिया है। एक परिवार जिसने दो-दो सदस्यों को खो दिया, उस परिवार के बेटे को फिर उसी तरह डराना और धमकाना शर्मनाक है। क्या यही हमारी भारतीय सभ्यता और राजनीति है?बीजेपी के प्रवक्ता का यह बयान –
‘राहुल गांधी को छाती में गोली मार देनी चाहिए’, यह महज जुबान की फिसलन नहीं है, बल्कि सोच-समझ कर दी गई धमकी है। जब ऐसे लोग सत्ता के नजदीक होते हैं और इस तरह की भाषा बोलते हैं, तो इसका असर पूरे देश की राजनीति और समाज पर पड़ता है। क्या सरकार सच में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, या फिर चुप्पी ओढ़े रहेगी?मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि राजनीतिक मतभेद को राजनीतिक तरीके से हल किया जाए, न कि हिंसा या धमकी की भाषा में।
सत्ता का नशा इतना भी न चढ़े कि विपक्ष के नेताओं की जान खतरे में डाली जाए। सरकार और गृह मंत्रालय को चाहिए कि घटना की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को सख्त सजा मिले, और देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जाए।हम सिर्फ राहुल गांधी पर हमला नहीं देख रहे, यह भारतीय लोकतंत्र और हर नागरिक की सुरक्षा पर हमला है। देश के संविधान और कानून की रक्षा के लिए सभी को आवाज उठानी चाहिए। डर और धमकी की राजनीति को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।”यह स्पीच उनके तेवर, तर्क और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु किए गए आह्वान को दर्शाता है, जैसा कि ऐसे संदर्भित मामलों में सामने आया ।