प्रेषक:
डॉ. संपूर्णानंद मल्ल, पूर्वांचल गांधी। पीएचडी (इतिहास एवं पुरातत्व), दिल्ली विश्वविद्यालय, विभाग: इतिहास, सामाजिक विज्ञान संकाय संपर्क: 9415418263दिनांक: 31 जनवरी 2026 (गांधी शहादत दिवस के अवसर पर)
माननीय राष्ट्रपति महोदया। ,मैं, डॉ. संपूर्णानंद मल्ल, पूर्वांचल गांधी, आपको गांधी शहादत दिवस (30 जनवरी) के पावन अवसर पर यह पत्र लिख रहा हूं। ‘मुझे केवल संविधान चाहिए और कुछ नहीं’ – भगत सिंह के इन अमर वचनों को याद करते हुए, मैं कहता हूं – इंकलाब जिंदाबाद। जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा था, ‘यहां रिवॉल्यूशन चाहिए’। 14 अप्रैल 2026 को संसद पर इंकलाब की चेतावनी देते हुए, मैं आज देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करता हूं। आज देश में जो कुछ भी हो रहा है, इसके लिए मां PM नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: ब्राह्मण, मुस्लिम आक्रांताओं से तुलना
जैसे ब्राह्मण आतंकियों ने बौद्ध विहारों को तोड़ा और बौद्ध भिक्षुओं की हत्या की, मुस्लिम आक्रांताओं ने मंदिरों को ध्वस्त कर हत्याएं कीं, वैसे ही उत्तराखंड CM पुष्कर सिंह धामी मस्जिदों को तोड़ने का कृत्य कर रहे हैं। यह संवैधानिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है। वहीं, असम CM हेमंत बिस्वा सरमा (नोट: आपके पत्र में ‘हेमंत विश्व शर्मा’ उल्लिखित, वास्तविक नाम हेमंत बिस्वा सरमा) मुसलमानों के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। वे उन्हें बांग्लादेश भगाने की धमकी दे रहे हैं। उनके बयान नफरत और जहर से भरे हैं, जो संविधान की एकता को पैरों तले कुचल रहे हैं।
महोदया, क्या ये कृत्य संवैधानिक हैं या असंवैधानिक? मा. गवर्नरों ने उत्तराखंड एवं असम में इन्हें संविधान की हत्या की शपथ दिलाई है क्या? इन दोनों ने सामने से संविधान की हत्या की है। ये सीमावर्ती राज्य हैं – उत्तराखंड चीन सीमा से सटा, असम बांग्लादेश से लगा। ऐसे राज्यों में नफरत फैलाना भारत की आंतरिक एकता, सुरक्षा और अखंडता के लिए घातक है।
संविधान रक्षा का आह्वान: गांधी से भगत सिंह तक
भारत में संविधान चलता है। यह देश गांधी, पटेल, नेहरू, अंबेडकर, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, अशफाकउल्ला खान, पंडित बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद का है। इनकी आत्मा सेक्युलरिज्म में बसी है, जो संविधान का मूल ढांचा है। मैं निवेदन करता हूं कि इन नफरतियों को हटाकर किसी योग्य व्यक्ति को CM बनाएं या उत्तराखंड-असम में राष्ट्रपति शासन लगाएं। महोदया, मेरे पूर्व पत्रों को पढ़ा जाए और जवाब दिया जाए। संविधान की हिफाजत कीजिए। सेक्युलरिज्म बचाइए, जो स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की विरासत है। संसद के सामने सत्याग्रह के लिए मैं विवश हूं। मैं अस्वस्थ हूं – मेरा रक्तचाप क्रिसमस डे (25 दिसंबर 2025) से बढ़ा हुआ है। चर्च के सामने हनुमान चालीसा पढ़ते देख मैं असहज हूं। यकीन नहीं हो रहा कि यह वही भारत है, जिसे गांधी, पटेल, नेहरू, अंबेडकर, सुभाष, भगत सिंह ने गढ़ा।
समाधान के सुझाव: राष्ट्रपति शासन क्यों जरूरी?
नफरत रोकें: धामी और सरमा के बयानों से सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है।
सीमावर्ती सुरक्षा: चीन-बांग्लादेश सीमा पर स्थिरता जरूरी
।संवैधानिक कर्तव्य: अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन विकल्प।
ऐतिहासिक न्याय: भगत सिंह की तरह इंकलाब से संविधान बचाएं।
महोदया, इंकलाब जिंदाबाद के नारे के साथ, मैं प्रतीक्षा करूंगा। संविधान जिंदाबाद!
भवदीया,
डॉ. संपूर्णानंद
मल्लपूर्वांचल गांधी