परिचय: एक नया ऊर्जा युग शुरू
भारत ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठा रहा है। अब विदेश से बिजली आएगी, वो भी समुद्र के नीचे बिछी हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) पावर केबल के जरिए! भारत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच ऐतिहासिक गठबंधन हो चुका है। यह प्रोजेक्ट One Sun, One World, One Grid (OSOWOG) विजन का हिस्सा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रस्तावित किया था।
इसके तहत भारत ग्रीन और रिन्यूएबल एनर्जी का बड़ा एक्सपोर्टर बनेगा, जबकि सऊदी-UAE जैसे देशों से जरूरत पड़ने पर क्लीन पावर इम्पोर्ट करेगा। 2025-2026 में तेजी से आगे बढ़ रहे इस प्रोजेक्ट से भारत की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी और ग्लोबल क्लाइमेट गोल्स हासिल करने में मदद मिलेगी।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं
- इन्वेस्टमेंट: कुल ₹90,000 करोड़ (लगभग 10-11 बिलियन डॉलर) का अनुमानित खर्च।
- सऊदी अरब लिंक: 1,700 किमी लंबी अंडरसी HVDC केबल, लागत करीब ₹47,000 करोड़। क्षमता 2 GW तक।
- UAE लिंक: 1,400-1,600 किमी लंबी केबल, लागत ₹43,000-43,500 करोड़। क्षमता भी 2 GW।
- समयसीमा: पूरा होने में 5-6 साल लग सकते हैं, लेकिन फीजिबिलिटी स्टडी और MoU पहले ही साइन हो चुके हैं।
- तकनीक: HVDC टेक्नोलॉजी से लंबी दूरी पर न्यूनतम लॉस के साथ पावर ट्रांसमिशन संभव। अरब सागर के नीचे स्पेशलाइज्ड शिप्स से केबल बिछाई जाएंगी।
यह प्रोजेक्ट India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) से भी जुड़ा है, जहां एनर्जी, हाइड्रोजन पाइपलाइन और डिजिटल केबल्स शामिल हैं।
फायदे: भारत के लिए गेम-चेंजर
यह सिर्फ बिजली का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि ऊर्जा डिप्लोमेसी का नया अध्याय है। प्रमुख लाभ:
- ग्रीन एनर्जी एक्सपोर्ट: भारत सोलर और विंड पावर से अतिरिक्त बिजली सऊदी-UAE को बेचेगा, जिससे राजस्व बढ़ेगा और जॉब्स क्रिएट होंगे।
- एनर्जी सिक्योरिटी: पीक डिमांड पर विदेश से क्लीन पावर इम्पोर्ट, फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम।
- क्लाइमेट गोल्स: 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल एनर्जी टारगेट में मदद। बैटरी स्टोरेज की जरूरत कम होगी।
- आर्थिक लाभ: IMEC से ट्रेड बढ़ेगा, कॉस्ट कम होगा और भारत ग्लोबल ग्रीन हब बनेगा।
- स्ट्रैटेजिक महत्व: चीन के BRI के मुकाबले मजबूत अल्टरनेटिव, मिडिल ईस्ट के साथ मजबूत रिश्ते।
चुनौतियां और भविष्य
अंडरसी केबल बिछाना महंगा और टेक्निकल चुनौतीपूर्ण है। गहराई, मौसम और जियोपॉलिटिकल रिस्क (जैसे रेड सी में हाल की घटनाएं) को ध्यान में रखना होगा। लेकिन भारत के Power Grid Corporation और अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स (Hitachi Energy आदि) की एक्सपर्टीज से यह संभव है।
प्रोजेक्ट पूरा होने पर भारत न सिर्फ बिजली आयात करेगा, बल्कि दुनिया को ग्रीन पावर सप्लाई करेगा।
यह OSOWOG का पहला बड़ा स्टेप है, जो आगे अफ्रीका, यूरोप और साउथईस्ट एशिया तक फैलेगा।
ऊर्जा का नया सूरज
भारत-सऊदी-UAE का यह गठबंधन सिर्फ केबल बिछाने की बात नहीं, बल्कि सस्टेनेबल फ्यूचर की नींव है।
समुद्र के नीचे हाई-वोल्टेज पावर केबल से नई ऊर्जा क्रांति शुरू होगी, जहां सूरज की रोशनी हर घर तक पहुंचेगी।
भारत अब एनर्जी एक्सपोर्टर से ग्लोबल लीडर बनने की राह पर है!