गोरखपुर एम्स
गोरखपुर एम्स में मरीज भर्ती विवाद
गोरखपुर एम्स में एक गंभीर मामला सामने आया, जहाँ इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए आए मरीज को भर्ती नहीं किया गया। इस घटना ने मरीज के तीमारदारों में भारी आक्रोश पैदा किया। तीमारदारों ने न केवल हंगामा किया, बल्कि OPD पर्ची फाड़ने का आरोप भी लगाया।
सूत्रों के अनुसार, सोमवार दोपहर को यह घटना हुई, जब मरीज गंभीर हालत में इमरजेंसी में पहुंचा। अस्पताल स्टाफ ने विभिन्न कारण बताते हुए मरीज को भर्ती करने से इनकार किया। इससे तीमारदारों और परिवार के सदस्यों में भारी तनाव और नाराजगी देखी गई।
🚨 तीमारदारों ने किया हंगामा, सुरक्षा बढ़ाई गई
मरीज के तीमारदारों का कहना था कि मरीज की हालत गंभीर थी और तुरंत भर्ती की जरूरत थी। जब स्टाफ ने भर्ती करने से मना किया, तो तीमारदारों ने जोर-जबरदस्ती करने की कोशिश की। इसके बाद अस्पताल प्रशासन को सुरक्षा बढ़ानी पड़ी और हंगामे को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बुलाया गया।
कुछ तीमारदारों ने OPD पर्ची फाड़ने का आरोप भी लगाया, जिससे पूरे वार्ड में अफरातफरी मच गई। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि मरीज की स्थिति और उपलब्ध बेड के आधार पर भर्ती का निर्णय लिया गया।
👩⚕️ अस्पताल प्रशासन का बयान
एम्स प्रशासन ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण हर मरीज को तुरंत भर्ती करना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि मरीज को इलाज के लिए उचित व्यवस्था की गई और प्राथमिक देखभाल उपलब्ध कराई गई।
प्रशासन ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की गलतफहमी और अफवाह फैलने से बचने के लिए अस्पताल में सूचना प्रणाली और सुरक्षा उपायों को कड़ा किया गया है।
⚠ विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े अस्पतालों में ऐसे हालात आम हैं, जहाँ मरीजों की संख्या
अधिक और संसाधन सीमित होते हैं।
ऐसे में प्रशासन को सही तरीके से
रोगियों और तीमारदारों को स्थिति समझाना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों ने तीमारदारों से अपील की है कि वे अस्पताल नियमों और स्टाफ के निर्देशों का पालन करें
, ताकि सभी मरीजों को समान रूप से और सुरक्षित तरीके से इलाज मिल सके।
📢 निष्कर्ष
गोरखपुर एम्स की यह घटना अस्पताल में मरीजों के भार और संसाधन की कमी को उजागर करती है।
साथ ही यह दिखाती है कि तीमारदारों की भावनाओं
और अस्पताल प्रोटोकॉल के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है।
हादसे के बाद प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में कर दी है और मरीज का इलाज जारी है।
उम्मीद है कि भविष्य में
अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया को और बेहतर बनाया
जाएगा ताकि ऐसे विवाद और हंगामे से बचा जा सके।