संसद में ऐतिहासिक बहस
मार्च 2026 के बजट सत्र में लोकसभा में एक दुर्लभ घटना घटी, जब विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। फरवरी 2026 में 118 सांसदों के हस्ताक्षर से नोटिस दिया गया था। आरोप थे कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करते हैं, विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं देते और सत्ताधारी दल का खुलकर समर्थन करते हैं। कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद (किशनगंज, बिहार) ने 9-10 मार्च को यह प्रस्ताव पेश किया, जिसमें महिला सांसदों पर विवादास्पद टिप्पणियों और संवेदनशील मुद्दों पर偏向 का जिक्र था।
बहस की प्रमुख झलकियां
बजट सत्र के दूसरे चरण में 10 घंटे से अधिक चली इस बहस में सत्ता और विपक्ष आमने-सामने रहे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तंज कसा कि वे ‘कैश फॉर वोट’ जैसे बड़े मुद्दों पर प्रस्ताव नहीं लाते, लेकिन स्पीकर पर दबाव बनाने को तैयार हैं। विपक्ष ने ओम बिरला को ‘जेंटलमैन’ बताते हुए कहा कि वे सरकार के दबाव में निष्पक्षता खो चुके हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने नियम पुस्तिका लहराते हुए पीठासीन अधिकारी पर सवाल उठाए। हंगामा बढ़ने पर वेल में नारेबाजी हुई। स्पीकर ओम बिरला ने नैतिकता दिखाते हुए बहस के दौरान सदन से दूरी बनाई, जिससे डिप्टी स्पीकर जगदंबिका पाल ने कार्यवाही संभाली।
अमित शाह का तीखा प्रहार
10 मार्च को गृह मंत्री अमित शाह ने बहस के अंत में विपक्ष को ललकारा। उन्होंने प्रस्ताव को ‘सुर्खियां बटोरने का ढोंग’ करार दिया और स्पीकर की निष्पक्षता का बचाव किया। शाह के भाषण से विपक्ष भड़क उठा, सांसद वेल में उतर आए और नारेबाजी की। जगदंबिका पाल ने सदस्यों से सीट पर लौटने की अपील की, लेकिन शोरगुल जारी रहा। मोहम्मद जावेद ने शाह से माफी मांगने की मांग की, लेकिन पीठासीन अधिकारी ने सीधे मतदान का फैसला लिया।
प्रस्ताव ध्वनिमत से गिरा
अंत में जगदंबिका पाल ने ध्वनिमत से वोटिंग कराई, जिसमें अविश्वास प्रस्ताव स्पष्ट रूप से खारिज हो गया। सत्ता पक्ष की मजबूत बहुमत के कारण कोई सस्पेंस नहीं था। विपक्ष का दावा था कि कम से कम
50 सांसद समर्थन देंगे, लेकिन संख्या बल कमजोर साबित हुआ। ओम बिरला का
पद सुरक्षित रहा, लेकिन इस घटना ने बजट सत्र को हंगामेदार बना दिया।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
यह प्रस्ताव विपक्ष की एकता का परीक्षण था, लेकिन NDA की मजबूत पकड़ के आगे नाकाम रहा।
कांग्रेस, AIMIM और अन्य दलों ने स्पीकर की आलोचना जारी रखी,
जबकि BJP ने इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ बताया। संसद सत्र में आगे बजट चर्चा प्रभावित हो सकती है।
ओम बिरला पर पक्षपात के आरोप अब भी चर्चा में हैं, जो लोकतंत्र की निष्पक्षता और
स्पीकर की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। यह घटना
भारतीय राजनीति में संसदीय परंपराओं और संतुलन की जरूरत को रेखांकित करती है।
