बिहार की राजनीति आज एक और ऐतिहासिक पल देखने जा रही है। राज्य के अनुभवी और लंबे राजनीतिक सफर वाले नेता नीतीश कुमार आज 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।
इसके साथ ही वह उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने इतने लंबे समय तक न सिर्फ सत्ता में बने रहकर अपनी पकड़ मजबूत रखी, बल्कि बार-बार बदलते राजनीतिक समीकरणों के बावजूद जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाए रखी।राजभवन में आयोजित इस समारोह में राज्यपाल फागू चौहान नीतीश कुमार को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
समारोह में भाजपा, जदयू और अन्य सहयोगी दलों के नेता मौजूद रहेंगे। अनुमान है कि उनके साथ कुछ अन्य मंत्री भी शपथ लेंगे और नया मंत्रिमंडल जल्द आकार लेगा।राजनीतिक सफर और उपलब्धियाँनीतीश कुमार का राजनीतिक सफर चार दशकों से भी लंबा रहा है।
वे 1980 के दशक में लोकदल से राजनीति की शुरुआत करने के बाद जनता दल और फिर जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख चेहरे बने। बिहार के विकास पुरुष कहे जाने वाले नीतीश कुमार ने 2005 में पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और तब से वे नौ बार इस पद पर रह चुके हैं।उनके शासनकाल में सड़क, बिजली और शिक्षा के क्षेत्र में राज्य में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले।
कानून-व्यवस्था में भी सुधार हुआ, जिससे बिहार में निवेश और विकास का रास्ता साफ हुआ।बार-बार बदलते राजनीतिक समीकरणनीतीश कुमार की राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने हमेशा परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति बनाई। भाजपा के साथ उनका गठजोड़ करीब 17 साल तक चला। 2013 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद उन्होंने गठबंधन तोड़ लिया।
2015 में उन्होंने राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन सरकार बनाई और एक बार फिर मुख्यमंत्री बने।हालांकि 2017 में उन्होंने एक बार फिर पाला बदलते हुए भाजपा से हाथ मिला लिया और महागठबंधन से बाहर आ गए।
इसके बाद 2022 में उन्होंने फिर एनडीए को छोड़कर राजद के साथ मिलकर सरकार बनाई। इन राजनीतिक उतार-चढ़ावों ने उन्हें “पलटू राम” जैसे तंज झेलने पर मजबूर किया, लेकिन उनकी राजनीतिक कुशलता और स्थिति संभालने की क्षमता ने हमेशा उन्हें सत्ता में बनाए रखा।दसवीं बार की शपथ का अर्थनीतीश कुमार के लिए यह शपथ सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके लंबे अनुभव, राजनीतिक स्थिरता और जनता के विश्वास की पहचान होगी।
दसवीं बार पद संभालने के बाद वे भारत में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में अपना स्थान और मजबूत करेंगे।वैसे यह शपथ कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब बिहार की राजनीति नए समीकरणों से गुजर रही है। माना जा रहा है कि इस बार वे भाजपा के साथ नए सिरे से सरकार चलाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भाजपा भी राज्य में स्थिर और मजबूत शासन देने पर सहमत दिखाई दे रही है।बिहार की जनता की उम्मीदेंजनता की उम्मीदें ऊपर हैं।
राज्य के ग्रामीण इलाकों में लोग चाहते हैं कि वे फिर से विकास का वह दौर लौटाएं जो पहली बार 2005 से 2010 के बीच देखा गया था। युवाओं में रोजगार, शिक्षा और उद्योग के अवसरों को लेकर बड़ी अपेक्षाएँ हैं। वहीं किसानों और महिलाओं के लिए राज्य में नई योजनाएँ लाने की जरूरत महसूस की जा रही है।नीतीश कुमार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार सुशासन के अपने एजेंडे को और आगे बढ़ाएगी।
“सात निश्चय योजना” के दूसरे चरण को गति दी जाएगी, जिसमें युवाओं के लिए कौशल विकास, महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास पर जोर होगा।विपक्ष की प्रतिक्रियाराजद ने इस पूरे घटनाक्रम को नीतीश कुमार की “राजनीतिक अवसरवादिता” बताया है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार बिहार की जनता के साथ बार-बार विश्वासघात कर रहे हैं।
हालांकि भाजपा और जदयू समर्थकों के अनुसार, यह कदम राज्य में स्थिरता और विकास के लिए आवश्यक है।कांग्रेस ने भी इसे लोकतंत्र की “कमजोरी” बताया, जबकि वाम दलों ने जनहित की नीतियों पर ध्यान देने की अपील की है।भविष्य की चुनौतियाँअब जब नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री पद संभालने जा रहे हैं, तो उनके सामने कई चुनौतियाँ खड़ी हैं।
आर्थिक दृष्टि से बिहार अभी भी देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार सृजन के क्षेत्र में राज्य को अभी लंबा सफर तय करना है।इसके अलावा, बदलते राजनैतिक हालात में उन्हें गठबंधन की एकता और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों बनाए रखनी होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वे इस बार अपने कार्यकाल को स्थिर और प्रभावी बना लेते हैं, तो वे भारतीय राजनीति में एक मिसाल कायम कर सकते हैं।
निष्कर्षनीतीश कुमार का दसवीं बार मुख्यमंत्री बनना न केवल उनके नेतृत्व की शक्ति को दर्शाता है, बल्कि बिहार की राजनीति की जटिलता को भी उजागर करता है। उनका यह नया कार्यकाल इस बात की परीक्षा होगी कि वे इतने वर्षों के अनुभव का उपयोग जनता के हित में किस प्रकार कर पाते हैं।
राज्य के लोग फिर से “सुशासन बाबू” से वैसी ही उम्मीदें लगाए बैठे हैं, जैसी पहले के दौर में रही थीं। अब देखने वाली बात यह होगी कि नीतीश कुमार इस ऐतिहासिक दसवें कार्यकाल में बिहार को नई दिशा देने में कितने सफल हो