जनवरी 2026 से भारत के आंगनबाड़ी केंद्रों में डिजिटल तकनीक आधारित क्रांतिकारी बदलाव लागू हो चुके हैं, जो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत पारदर्शिता, दक्षता और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शुरू किए गए हैं। ये नए नियम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए अनिवार्य हैं, जिसमें डिजिटल रिकॉर्डिंग, स्मार्ट क्लासेस और पोषण ट्रैकिंग ऐप्स का उपयोग प्रमुख है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पहले चरण में इन्हें लागू किया गया है, जबकि शीतलहर के कारण केंद्र 14 जनवरी तक बंद रहने के बावजूद डिजिटल कार्य जारी रहेंगे।
आंगनबाड़ी डिजिटल नियमों के मुख्य बदलाव
आंगनबाड़ी बहनों को अब दो प्रमुख नए काम करने होंगे: पहला, बच्चों की दैनिक प्रगति, वजन, ऊंचाई और पोषण स्तर का डिजिटल रिकॉर्ड रखना, जो पोषण ट्रैक ऐप के माध्यम से रीयल-टाइम अपडेट होगा। दूसरा, स्मार्ट क्लासेस आयोजित करना, जहां टैबलेट या मोबाइल पर एनिमेटेड वीडियो और इंटरएक्टिव कंटेंट से 3-6 वर्ष के बच्चों को पूर्व-प्राथमिक शिक्षा दी जाएगी। सुपरवाइजर अब डैशबोर्ड से सीधे निगरानी करेंगे, जिससे फर्जीवाड़ा रुकेगा और सेवाएं सटीक होंगी। ये बदलाव POSHAN 2.0 योजना का हिस्सा हैं, जो केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया पहल से जुड़े हैं।

डिजिटल तकनीक के नए फीचर्स और ट्रेनिंग
आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण ट्रैक ऐप मुख्य फीचर है। यह ऐप बच्चों का ग्रोथ मॉनिटरिंग करता है और अलर्ट भेजता है यदि पोषण में कमी हो। स्मार्ट क्लासेस के लिए टैबलेट पर प्री-लोडेड कंटेंट है – कहानियां, गाने, गणित और भाषा सीखने के गेम। जीपीएस से उपस्थिति ट्रैक होगी। कार्यकर्ताओं को दिसंबर 2025 में ट्रेनिंग दी गई। ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में ऐप काम करता है। डेटा सुरक्षित रखने के लिए साइबर सिक्योरिटी फीचर्स हैं।
ट्रेनिंग में कार्यकर्ताओं को ऐप यूज, डेटा एंट्री और स्मार्ट क्लासेस चलाना सिखाया गया।
कई राज्यों में पायलट सफल रहा। अब पूरे देश में लागू है। कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन या टैबलेट दिए जा रहे हैं।
फायदे और प्रभाव
ये बदलाव से पोषण स्तर सुधरेगा। कुपोषण के केस जल्द पकड़े जाएंगे। शिक्षा में सुधार होगा।
पारदर्शिता बढ़ेगी। फर्जी उपस्थिति रुकेगी। सरकार को रीयल-टाइम डेटा मिलेगा।
ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल साक्षरता मिलेगी। POSHAN 2.0 के लक्ष्य पूरे होंगे।
चुनौतियां और समाधान
ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या है, लेकिन ऑफलाइन मोड है।
ट्रेनिंग से कार्यकर्ताएं सक्षम हो रही हैं। सरकार ने हेल्पलाइन शुरू की है।
ये नए नियम आंगनबाड़ी को डिजिटल युग में ले जा रहे हैं। बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा।
कार्यकर्ताएं सशक्त होंगी। यह क्रांति देश के विकास में मील का पत्थर है।
