नेपाल की सबसे पुरानी और प्रमुख विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन की मांग चल रही थी। पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा (पांच बार के पूर्व प्रधानमंत्री) के खिलाफ युवा नेताओं का असंतोष बढ़ता जा रहा था। महासचिव गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा जैसे युवा चेहरों ने पार्टी में सुधार, नई ऊर्जा और आगामी चुनावों के लिए मजबूत नेतृत्व की मांग की।
जनवरी 2026 में 54 प्रतिशत से अधिक महाधिवेशन प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर के साथ दूसरा विशेष महाधिवेशन काठमांडू के भृकुटीमंडप में आयोजित किया गया। यह महाधिवेशन देउबा गुट की मंजूरी के बिना बुलाया गया, जिससे पार्टी में गहरा विभाजन पैदा हो गया। देउबा गुट ने गगन थापा, विश्व प्रकाश शर्मा और अन्य को पार्टी से निलंबित कर दिया, लेकिन विशेष महाधिवेशन जारी रहा।
गगन थापा का निर्विरोध चुनाव: युवा नेतृत्व की जीत
15 जनवरी 2026 को विशेष महाधिवेशन के दौरान गगन थापा ने अध्यक्ष पद के लिए एकमात्र नामांकन दाखिल किया। चुनाव समिति के समन्वयक सीताराम केसी ने घोषणा की कि कोई अन्य उम्मीदवार नहीं होने के कारण गगन कुमार थापा को निर्विरोध नेपाली कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।
थापा ने विजय भाषण में कहा, “आपने मुझे पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी है, मैं किसी को भी किसी के सामने झुकने नहीं दूंगा। नेपाली कांग्रेस की गरिमा बनाए रखूंगा।” उनके साथ विश्व प्रकाश शर्मा और पुष्पा भुसाल उपाध्यक्ष, गुरु घिमिरे और प्रदीप पौडेल महासचिव चुने गए। नई 134 सदस्यीय केंद्रीय समिति भी निर्वाचित की गई।
यह घटना पार्टी में “पीढ़ीगत परिवर्तन” की मांग को पूरा करती है। थापा (49 वर्ष) को युवा और प्रगतिशील नेता के रूप में जाना जाता है, जो स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए लोकप्रिय हुए थे।
पार्टी विभाजन: देउबा गुट का विरोध जारी
विशेष महाधिवेशन से पहले देउबा गुट ने समझौते की कोशिश की, लेकिन असफल रही। देउबा ने थापा-शर्मा को
5 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया और कहा कि यह महाधिवेशन असंवैधानिक है।
दूसरी ओर, थापा गुट ने दावा किया कि
54% प्रतिनिधियों का समर्थन होने से यह वैध है और देउबा की केंद्रीय समिति भंग हो चुकी है।
यह विभाजन नेपाली कांग्रेस की तीसरी बड़ी फूट है
(पहली 2002 में माओवादी विद्रोह के दौरान)। अब पार्टी दो गुटों में बंट गई है –
एक देउबा के नेतृत्व में और दूसरा थापा के नेतृत्व में। चुनाव आयोग को
अब फैसला करना होगा कि कौन सा गुट आधिकारिक है।
नेपाल राजनीति पर प्रभाव: नई उम्मीद या अस्थिरता?
गगन थापा का अध्यक्ष बनना नेपाल की राजनीति में नई ऊर्जा ला सकता है।
युवा मतदाता और सुधार चाहने वाले कार्यकर्ता खुश हैं। लेकिन विभाजन से पार्टी कमजोर हो सकती है,
खासकर मार्च 2026 के आम चुनाव से पहले। देउबा गुट का अनुभव और संसदीय ताकत अभी भी मजबूत है।
यह घटनाक्रम नेपाल में लोकतंत्र, पार्टी आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व परिवर्तन की बहस को तेज करेगा।
क्या थापा गुट पार्टी को एकजुट कर पाएगा या विभाजन स्थायी हो जाएगा? समय बताएगा।
नेपाली कांग्रेस के इस ऐतिहासिक मोड़ पर सभी की नजरें टिकी हैं।