नेपाल जलप्रलय: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय ने कई परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी है। कहीं लोग अपनों की तलाश में भटक रहे हैं तो कहीं मलबे के बीच से जिंदगी की उम्मीदें निकाली जा रही हैं। इसी त्रासदी के बीच देवीघाट से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने दर्द के बीच उम्मीद को जिंदा रखा है। नदी के दूसरी ओर स्कूल गए दो मासूम बच्चे चार दिन बाद सेना की मदद से अपने घर लौट सके। घर तो बाढ़ में बह चुका था, लेकिन बच्चों को सुरक्षित देखकर मां और बहन की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।
दूसरी ओर नेपाल के नुवाकोट जिले में एक स्थान से 24 शवों के मिलने की घटना ने बचाव अभियान की मुश्किलों और आपदा की भयावहता को उजागर कर दिया है। बिदुर नगरपालिका क्षेत्र के बेत्राबती में मलबे से शव बरामद किए गए। स्थानीय पुलिस के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वह इमारत किसकी थी। बचाव दल अब भी प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रहे हैं।
चार दिन तक बच्चों का इंतजार करती रही मां
देवीघाट में रहने वाली अनीता सानी के लिए बीते चार दिन किसी भयावह इंतजार से कम नहीं थे। उनके दोनों बच्चे नदी के दूसरी तरफ स्थित स्कूल गए थे। इसी दौरान बाढ़ के कारण पुल बह गया और इलाके का संपर्क टूट गया। मोबाइल नेटवर्क भी काम नहीं कर रहा था।
ऐसे हालात में परिवार को बच्चों की कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी। हर गुजरता घंटा चिंता बढ़ा रहा था। लेकिन चार दिन बाद जब दोनों बच्चे सेना की सहायता से वापस पहुंचे तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
मां और बहन ने बच्चों को देखते ही उन्हें सीने से लगा लिया। जिस परिवार ने कुछ दिन पहले तक अपने घर और सामान की चिंता की थी, उसके लिए उस पल सबसे बड़ी संपत्ति बच्चों की सुरक्षित वापसी थी।
घर की जगह बचा था तबाही का मंजर
बच्चों के लौटने के बाद परिवार जब अपने पुराने घर की जगह पहुंचा तो वहां रहने के लिए कुछ नहीं बचा था। बाढ़ ने पूरा आशियाना उजाड़ दिया था।
अनीता जब अपने बच्चों के साथ वहां पहुंचीं तो उनकी नजरें उस जगह को तलाश रही थीं जहां कभी उनका घर हुआ करता था। लेकिन सामने तबाही के निशान थे।
आपदा ने घर, सामान और रोजमर्रा की जिंदगी छीन ली, लेकिन बच्चों के वापस आने की खुशी ने उस दर्द को कुछ समय के लिए पीछे धकेल दिया।
यह घटना बताती है कि प्राकृतिक आपदा के समय इंसान के लिए सबसे बड़ी चिंता संपत्ति नहीं, बल्कि अपनों की सुरक्षा होती है।
एक ही जगह मिले 24 शव, बचावकर्मी भी हुए स्तब्ध
नेपाल में बाढ़ की भयावहता का दूसरा पहलू नुवाकोट जिले के बिदुर नगरपालिका क्षेत्र में देखने को मिला। बेत्राबती इलाके में एक स्थान से 24 शव बरामद किए गए।
पुलिस अधीक्षक बिपिन रेग्मी के अनुसार यह पता नहीं चल सका है कि जिस जगह से शव मिले हैं, उसका वास्तविक मालिक कौन था। इमारत होटल या गेस्टहाउस जैसी दिखाई देती है।
एक ही स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में शव मिलने से राहत और बचाव दल के सामने भी चुनौती और बढ़ गई है। मलबे में अब भी लोगों के दबे होने की आशंका के बीच अभियान जारी है।
सेना और सुरक्षा बलों ने संभाला राहत अभियान
नेपाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों और संपर्क व्यवस्था बाधित होने के बावजूद बचावकर्मी प्रभावित लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी अभियान के दौरान रसुवा जिले में करीब डेढ़ महीने की एक बच्ची को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया। बच्ची को धुन्चे कैंप पहुंचाया गया। बचावकर्मियों द्वारा उसे बेहद सावधानी से सुरक्षित स्थान तक ले जाने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।
सुरंग में फंसे 23 मजदूर भी परिवारों से मिले
नेपाल की बाढ़ ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम कर रहे मजदूरों को भी प्रभावित किया। भोटेकोशी बाढ़ में फंसे बरबारदिया के 23 मजदूर करीब पांच दिन बाद अपने परिवारों के पास लौट सके।
इन मजदूरों ने बताया कि अचानक बाढ़ का पानी सुरंग के आसपास पहुंच गया था। खतरे का पता चलने के बाद उन्होंने बाहर निकलकर ऊंची जगह पर पहुंचकर अपनी जान बचाई।
हालांकि, बरबारदिया के कई अन्य लोगों का अभी भी पता नहीं चल पाया है। इससे उनके परिवारों की चिंता बनी हुई है।
भारतीय टीम भी राहत और पहचान के काम में जुटी
नेपाल में जारी आपदा के बीच भारत की 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम ने काठमांडो में काम शुरू किया है। टीम का उद्देश्य आपदा में मृत लोगों की पहचान से जुड़े कार्यों में सहयोग करना है।
इसके अलावा बचाव दल भी कठिन परिस्थितियों के बावजूद अभियान जारी रखे हुए हैं।
आपदा के बाद शवों की पहचान और उन्हें उनके परिवारों तक
पहुंचाना राहत अभियान का बेहद संवेदनशील हिस्सा बन गया है।
महिला हेलिकॉप्टर पायलट ने उड़ाईं 100 से ज्यादा उड़ानें
नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर पायलट प्रिया अधिकारी भी राहत अभियान में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने एक सप्ताह के दौरान 100 से ज्यादा
उड़ानें भरकर लोगों को बचाने और राहत पहुंचाने में योगदान दिया है।
आपदा के बीच लगातार उड़ान भरना चुनौतीपूर्ण काम है, लेकिन बचाए गए लोगों को
सुरक्षित देखकर मिलने वाली राहत उनके लिए इस कठिन अभियान की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी हुई है।
नेपाल में जलप्रलय ने छोड़े कई सवाल
नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, नदी किनारे निर्माण,
समय रहते चेतावनी और सुरक्षित निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जब संपर्क मार्ग टूट जाते हैं और मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाता है, तब प्रभावित लोगों तक
मदद पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता है। ऐसे में मजबूत स्थानीय आपदा प्रतिक्रिया तंत्र और समय पर
चेतावनी व्यवस्था जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दर्द के बीच जिंदा है उम्मीद
नेपाल की इस त्रासदी में एक तरफ 24 शवों की बरामदगी जैसी दिल दहला देने वाली घटनाएं हैं, तो
दूसरी तरफ चार दिन बाद दो मासूमों की सुरक्षित घर वापसी और
डेढ़ महीने की बच्ची का बचाया जाना उम्मीद की किरण भी दिखाता है।
प्राकृतिक आपदा के बीच हर सुरक्षित बचाई गई जिंदगी राहतकर्मियों और
परिवारों के लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। अब सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को ढूंढना है जो
अभी भी लापता हैं और उनके परिवारों को अपनों की खबर देना है।
मुख्य बातें
- नेपाल के देवीघाट में दो बच्चे चार दिन बाद सुरक्षित घर लौटे।
- दोनों बच्चे स्कूल गए थे, इसी दौरान बाढ़ से पुल बह गया और संपर्क टूट गया।
- बच्चों की सुरक्षित वापसी पर मां और बहन भावुक हो गईं।
- बाढ़ में परिवार का घर पूरी तरह उजड़ गया।
- नुवाकोट के बिदुर नगरपालिका क्षेत्र में एक जगह से 24 शव मिले।
- बचाव दल अब भी मलबे में लोगों की तलाश कर रहा है।
- रसुवा में करीब डेढ़ महीने की बच्ची को सुरक्षित बचाया गया।
- 23 मजदूर पांच दिन बाद अपने परिवारों से मिल सके।
- भारतीय 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम काठमांडो में काम कर रही है।
- महिला हेलिकॉप्टर पायलट प्रिया अधिकारी ने 100 से ज्यादा उड़ानें भरीं।
FAQ
1. नेपाल में इस समय किस तरह की आपदा आई है?
नेपाल के कई इलाकों में भीषण बाढ़ और जलप्रलय से भारी तबाही हुई है।
कई जगह संपर्क मार्ग टूटे हैं और बचाव अभियान चल रहा है।
2. देवीघाट के बच्चों के साथ क्या हुआ?
दो बच्चे नदी के दूसरी तरफ स्कूल गए थे। बाढ़ के कारण पुल बह गया और संपर्क टूट गया।
चार दिन बाद सेना की मदद से दोनों सुरक्षित घर लौटे।
3. बच्चों का घर क्यों उजड़ गया?
बाढ़ के पानी ने इलाके में भारी तबाही मचाई, जिससे परिवार का घर भी बह गया।
4. 24 शव कहां मिले?
24 शव नेपाल के नुवाकोट जिले के बिदुर नगरपालिका क्षेत्र के बेत्राबती में एक स्थान से बरामद किए गए।
5. क्या बचाव अभियान अभी जारी है?
हां। नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में खोज और राहत अभियान चला रही हैं।
6. क्या किसी बच्चे को भी बचाया गया है?
रसुवा जिले में करीब डेढ़ महीने की बच्ची को बचाव दल ने सुरक्षित निकालकर धुन्चे कैंप पहुंचाया।
7. कितने मजदूर सुरक्षित लौटे?
भोटेकोशी बाढ़ में फंसे 23 मजदूर करीब पांच दिन बाद अपने परिवारों के पास वापस पहुंचे।
8. भारत ने नेपाल की मदद के लिए क्या किया?
भारत की 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम काठमांडो पहुंचकर पहचान और संबंधित कार्यों में सहयोग कर रही है।
9. नेपाल में राहत अभियान की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
कई इलाकों में सड़क, पुल और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण
बचाव दलों को पहुंचने और लोगों की पहचान करने में कठिनाई हो रही है।
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