स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 के बाद सत्ता संभालते ही औद्योगिक क्रांति की नींव रखी। उन्होंने बड़े बांधों और बहुउद्देशीय परियोजनाओं को प्राथमिकता दी, जो बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण साबित हुईं। ये परियोजनाएं आधुनिक भारत के “नए मंदिर” के रूप में जानी जाती हैं। नेहरू के नेतृत्व में भाखड़ा-नांगल, दामोदर वैली, हीराकुंड और नागार्जुन सागर जैसी परियोजनाओं ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।
भाखड़ा-नांगल बांध: एशिया का सबसे ऊंचा बांध
नेहरू ने भाखड़ा-नांगल डैम परियोजना को विशेष गति दी। इसका शिलान्यास 1955 में हुआ और पूरा प्रोजेक्ट 1963 में नेहरू द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह एशिया का सबसे ऊंचा बांध है, जो सतलुज नदी पर बना। इसकी बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 1325-1379 MW है और यह 10 मिलियन एकड़ से अधिक जमीन की सिंचाई करता है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों को इससे भरपूर ऊर्जा और पानी मिला, जिसने हरित क्रांति की आधारशिला रखी।
दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (DVC): भारत का पहला बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट
दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (DVC) भारत का पहला रिवर वैली प्रोजेक्ट था, जो 7 जुलाई 1948 को स्थापित हुआ। नेहरू के नेतृत्व में यह पश्चिम बंगाल और बिहार (अब झारखंड) के लिए बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और बिजली उत्पादन के उद्देश्य से बनाया गया। इसमें तिलैया, कोनार, मैथन और पांचेत हिल डैम शामिल हैं। यह परियोजना नेहरू की पहली पंचवर्षीय योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा थी और टीवीए (अमेरिका) मॉडल पर आधारित थी। DVC ने कोयला क्षेत्रों को बाढ़ से बचाया और औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया।
हीराकुंड बांध: भारत का सबसे लंबा बांध
हीराकुंड डैम की नींव पंडित नेहरू ने 1948 में रखी और इसका उद्घाटन 13 जनवरी 1957 को किया। ओडिशा की महानदी नदी पर बना यह भारत का सबसे लंबा अर्थेन डैम है, जिसकी कुल लंबाई 25.8 किमी है। यह बहुउद्देशीय परियोजना बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, मछली पालन, पर्यटन और बिजली उत्पादन के लिए जानी जाती है। हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई से लाखों किसानों को लाभ हुआ और ओडिशा के डेल्टा क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा मिली। हीराकुंड ने पूर्वी भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नागार्जुन सागर बांध: कृष्णा नदी पर नेहरू की योजना
नागार्जुन सागर डैम की नींव पंडित नेहरू ने 10 दिसंबर 1955 को रखी। कृष्णा नदी पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में स्थित यह विश्व की सबसे बड़ी मेसनरी डैम है।
यह सिंचाई और हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर के लिए महत्वपूर्ण है।
पहली पंचवर्षीय योजना में भाखड़ा और हीराकुंड के साथ शामिल यह प्रोजेक्ट सूखाग्रस्त क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने में सफल रहा।
इससे लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचित हुई और बिजली उत्पादन बढ़ा।
औद्योगिक विकास: HMT और हिंदुस्तान केबल्स
नेहरू के विजन से हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT) की स्थापना 1953 में बेंगलुरु में हुई।
यह मशीन टूल्स, घड़ियां और ट्रैक्टर बनाने वाला भारत का प्रमुख केंद्र बना, जो मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का प्रतीक है।
इसी तरह हिंदुस्तान केबल्स (HC) 1952 में रूपनारायणपुर में शुरू हुई, जिसने केबल उद्योग को मजबूती दी।
निष्कर्ष: नेहरू की विरासत आज भी जीवंत
नेहरू की इन परियोजनाओं ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया। बाढ़ नियंत्रण से ऊर्जा उत्पादन तक, ये
“आधुनिक भारत के मंदिर” आज भी लाखों लोगों की जीवन रेखा हैं।
नेहरू का योगदान स्वतंत्र भारत के औद्योगिक और कृषि विकास की आधारशिला है।