संसद में ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल, माइक बंद का विवाद। संसद के हंगामे भरे सत्र में एक सांसद ने मोदी सरकार पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मैंने संसद में कहा कि मोदी सरकार ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया है – माइक बंद कर दिया गया।” यह बयान पेट्रोलियम क्षेत्र की नीतियों पर केंद्रित था, जहां विपक्ष का दावा है कि विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता दांव पर लग गई है। मोदी सरकार ऊर्जा सुरक्षा की खोज में लाखों यूजर्स ऐसे सवाल उठा रहे हैं। क्या यह आकस्मिक था या सुनियोजित सेंसरशिप? विपक्षी नेता ने तेल आयात पर निर्भरता और रिफाइनरी प्रोजेक्ट्स में देरी का जिक्र किया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं। संसदीय कार्यवाही में माइक बंद करना लोकतंत्र की गरिमा पर सवाल खड़े करता है।
एपस्टीन फाइल्स में मोदी का नाम, तत्काल माइक
सबसे विवादास्पद बयान तब आया जब सांसद ने एपस्टीन फाइल्स मोदी का जिक्र किया। “मैंने मोदी जी का नाम एपस्टीन फाइल में होने का जैसे ही जिक्र किया – माइक बंद कर दिया गया।” जेफरी एपस्टीन की कुख्यात फाइल्स में कई वैश्विक हस्तियों के नाम सामने आए हैं, लेकिन मोदी का नाम जोड़ना नया ट्विस्ट है। विपक्ष का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों की रिपोर्ट्स में अप्रत्यक्ष संदर्भ हैं, जो दबाए जा रहे हैं। एपस्टीन फाइल्स कांड ने दुनिया को हिला दिया था, और भारत में इसका राजनीतिकरण हो गया। संसद में ऐसा संवेदनशील मुद्दा उठाने पर माइक बंद करना सवालों को और गहरा देता है। क्या यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों की मजबूरी है या कुछ छिपाने की कोशिश?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर एपस्टीन कनेक्शन के सवाल
विपक्ष ने सीधे पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी एपस्टीन से जुड़े सवाल उठाए। “मैंने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और एपस्टीन से जुड़े सवाल उठाए – माइक बंद कर दिया गया।” पुरी की विदेश यात्राओं और ऊर्जा डील्स पर शक जताया गया, जहां एपस्टीन नेटवर्क से कथित लिंक का दावा किया। भारत की ऊर्जा नीतियां वैश्विक लॉबी से प्रभावित होने का आरोप लगाया गया। हरदीप सिंह पुरी पर विपक्ष लगातार निशाना साध रहा है, खासकर तेल कीमतों और गैस सप्लाई पर। संसद में माइक बंद होने से बहस अधर में लटक गई, लेकिन सोशल मीडिया पर #MikeBandModi ट्रेंड कर रहा है।
सोरोस फंडिंग और मंत्री की बेटी की कंपनी का रहस्य
सबसे चौंकाने वाला खुलासा था सोरोस के पैसे का। “मैंने उनकी बेटी की कंपनी में सोरोस के पैसे लगे होने पर बात करने की कोशिश की – माइक बंद कर दिया गया।” जॉर्ज सोरोस की फंडिंग वाली कंपनी में कथित निवेश का जिक्र किया गया, जो सोरोस फंडिंग मोदी से जोड़ दिया। विपक्ष का कहना है कि यह विदेशी हस्तक्षेप का सबूत है। सोरोस फाउंडेशन की भारत में गतिविधियां पहले भी विवादों में रहीं। क्या यह एनजीओ फंडिंग का मामला है या कुछ बड़ा?
सौ बातों की एक बात: नरेंद्र सरेंडर हो गया
सांसद ने निष्कर्ष निकाला, “सौ बातों की एक बात, जो दबाए न दबेगी – नरेंदर सरेंडर हो गया है।” नरेंद्र सरेंडर हैशटैग वायरल हो चुका है। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर एपस्टीन तक हर सवाल पर माइक बंद होना लोकतंत्र पर हमला लगता है। सरकार ने सफाई दी कि यह सदन की व्यवस्था का हिस्सा था, लेकिन विपक्ष असहमत है। संसद माइक बंद विवाद 2026 के सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दे बन चुका है। क्या विपक्ष के हाथ मजबूत सबूत हैं या महज राजनीतिक ड्रामा?
