MMMUT गोरखपुर में तैयार होगा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ लैब; चिप डिजाइनिंग को मिलेगी नई रफ्तार
Meta Description: MMMUT गोरखपुर में 4 करोड़ रुपये की लागत से नेक्स्ट जनरेशन सेमीकंडक्टर्स एंड नैनो डिवाइसेज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लैब बनेगी। चिप डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग पर फोकस, स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री रेडी बनाएगा। (148 characters)
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT), गोरखपुर पूर्वांचल के तकनीकी शिक्षा का प्रमुख केंद्र, अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। विश्वविद्यालय में जल्द ही “नेक्स्ट जनरेशन सेमीकंडक्टर्स एंड नैनो डिवाइसेज” नामक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) लैब स्थापित की जाएगी। इसकी लागत करीब 4 करोड़ रुपये होगी, जो भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत चिप डिजाइनिंग को गति देने का प्रयास है। यह लैब स्टूडेंट्स को चिप के डिजाइन से लेकर प्रोटोटाइप निर्माण और क्वालिटी टेस्टिंग तक की पूरी प्रक्रिया सिखाएगी, जिससे युवाओं को सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: क्या होगा खास?
यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस MMMUT के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के तहत विकसित होगा। अभी तक विश्वविद्यालय के छात्र केवल कंप्यूटर सॉफ्टवेयर पर चिप डिजाइनिंग सीखते थे, लेकिन नई लैब में वे रीयल-टाइम चिप डेवलपमेंट का अनुभव प्राप्त करेंगे। यहां एडवांस्ड उपकरणों से चिप के डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग और नैनो डिवाइसेज पर रिसर्च होगी। छात्रों को ASIC डिजाइन फ्लो (RTL-GDSII) जैसी प्रोफेशनल स्किल्स सिखाई जाएंगी, जो ग्लोबल चिप इंडस्ट्री की मांग के अनुरूप हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.एन. पांडेय ने बताया कि यह लैब 2025 के अंत तक चालू हो जाएगी। इससे न केवल MMMUT के 5000 से अधिक छात्र लाभान्वित होंगे, बल्कि पूर्वांचल के अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों के स्टूडेंट्स को भी इंटर्नशिप के अवसर मिलेंगे। लैब में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) से जुड़े नैनो डिवाइसेज पर फोकस होगा, जो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए उपयोगी साबित होंगे।
चिप डिजाइनिंग को मिलेगी रफ्तार: आत्मनिर्भर भारत का योगदान
भारत सरकार का सेमीकंडक्टर मिशन 2025 में तेजी पकड़ रहा है। देश में चिप उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 76,000 करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। MMMUT का यह सेंटर उसी कड़ी का हिस्सा है। गोरखपुर जैसे क्षेत्र में ऐसी लैब स्थापित होने से पूर्वांचल के युवाओं को दिल्ली-बेंगलुरु जैसे महानगरों की ओर पलायन की जरूरत कम हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे 2026 तक उत्तर प्रदेश में 10,000 से अधिक जॉब्स क्रिएट होंगी।
पिछले साल MMMUT ने AISPARK सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू किया था
, जो AI और मशीन लर्निंग पर केंद्रित है। अब यह नया CoE VLSI डिजाइन और मटेरियल साइंस को मजबूत करेगा।
छात्रों को इंडस्ट्री पार्टनरशिप के तहत प्रोजेक्ट्स मिलेंगे, जैसे SoCTeamup Semiconductors जैसी कंपनियों के साथ कोलेबोरेशन।
इससे प्लेसमेंट रेट, जो पहले से 80% के आसपास है, और बेहतर होगा।
MMMUT का तकनीकी सफर: गोरखपुर का गौरव
MMMUT की स्थापना 1962 में मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी, जो 2013 में विश्वविद्यालय बना।
354 एकड़ के हरे-भरे कैंपस में 10,000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं।
यहां पहले से ही कंप्यूटिंग लैब्स, डिजाइन लैब्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेंटर्स हैं।
लेकिन चिप डिजाइनिंग लैब से यह विश्वविद्यालय नैनोटेक्नोलॉजी का हब बनेगा।
गोरखपुर, जो योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, अब टेक हब के रूप में उभरेगा।
स्थानीय विकास के लिए यह कदम सरकारी योजनाओं जैसे डिजिटल इंडिया से जुड़ेगा।
लाभ और भविष्य की संभावनाएं
यह लैब छात्रों को ग्लोबल कंपनियों जैसे Intel, Qualcomm के लिए तैयार
करेगी। महिलाओं और ग्रामीण छात्रों के लिए स्पेशल वर्कशॉप्स आयोजित होंगी।
पर्यावरण के लिहाज से नैनो डिवाइसेज सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी पर रिसर्च करेंगे।
कुल मिलाकर, MMMUT का यह प्रयास पूर्वांचल को टेक्नोलॉजी मैप पर स्थापित करेगा।
