मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड का फैसला, मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड

मेरठ, उत्तर प्रदेश | 15 अक्टूबर 2026

परिचय

उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। दोनों को मुस्कान के पति सौरभ राजपूत की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस फैसले ने एक बार फिर पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है।

मुख्य खबर

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को अहम फैसला सुनाया। जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मृत्युदंड की सजा दी। सौरभ राजपूत मुस्कान के पति थे और मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे थे। हत्या के बाद उनके शव को क्षत-विक्षत कर नीले प्लास्टिक के ड्रम में सीमेंट भरकर छिपाने का मामला सामने आया था। इस घटना ने देशभर में लोगों को झकझोर दिया था।

अदालत ने क्यों सुनाई मौत की सजा?

इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने से संबंधित अपराधों में दोषी ठहराया था। इसके बाद सजा की मात्रा पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और साक्ष्य छिपाने के तरीके का हवाला देते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी। अदालत ने 14 अक्टूबर को दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाह पेश किए गए। करीब 13 महीने चली न्यायिक प्रक्रिया में 126 सुनवाइयां हुईं। अदालत के समक्ष परिस्थितिजन्य, चिकित्सकीय और अन्य साक्ष्यों पर विचार किया गया। फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

मार्च 2025 में सामने आया था सनसनीखेज मामला

यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव को छिपाने के लिए नीले प्लास्टिक के ड्रम का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई। जांच में हत्या और शव को ठिकाने लगाने से जुड़े आरोपों को लेकर पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया था।

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में आरोपों को साबित करने के लिए साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। इसके बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया और सजा सुनाने के लिए अलग तारीख निर्धारित की।

फैसले के दिन क्या हुआ?

14 अक्टूबर को सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों दोषी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए। अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने नरमी बरतने का अनुरोध किया था। अंततः अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई।

मामले की सुनवाई और सजा के दौरान परिवारों की भावनाएं भी चर्चा में रहीं। हालांकि, मुस्कान द्वारा अदालत में अपनी बच्चियों के भविष्य को लेकर कोई विशेष बयान दिए जाने की बात को आधिकारिक पुष्टि के बाद ही तथ्य के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए।

आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?

मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं होती। भारतीय कानून के तहत सत्र न्यायालय द्वारा दी गई मौत की सजा को उच्च न्यायालय की पुष्टि की आवश्यकता होती है। दोषियों को लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार अपील और अन्य उपलब्ध न्यायिक उपायों का अधिकार भी प्राप्त होता है।

इसलिए अदालत का फैसला महत्वपूर्ण होने के बावजूद मृत्युदंड के अंतिम क्रियान्वयन से पहले संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। मामले में आगे की कार्यवाही पर भी नजर बनी रहेगी।

Headings

मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत का फैसला

सौरभ राजपूत की हत्या और शव छिपाने का मामला

126 सुनवाइयों के बाद आया फैसला

मृत्युदंड के बाद आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?

Facts/Details

  • मामला: मेरठ का चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड।
  • मृतक: सौरभ राजपूत, मर्चेंट नेवी से जुड़े पूर्व कर्मी।
  • दोषी: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला।
  • घटना का समय: मार्च 2025।
  • दोषसिद्धि की तारीख: 30 सितंबर 2026।
  • सजा की तारीख: 14 अक्टूबर 2026।
  • अदालत: मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत।
  • न्यायाधीश: अरविंद कुमार मिश्रा।
  • सुनवाई: लगभग 13 महीने।
  • गवाह: अभियोजन पक्ष के 22 गवाह।
  • सुनवाइयां: कुल 126।
  • सजा: दोनों दोषियों को मृत्युदंड।
  • मुख्य आरोप: हत्या और साक्ष्य मिटाना।
  • अगला चरण: मृत्युदंड की उच्च न्यायालय से पुष्टि सहित लागू कानूनी प्रक्रिया।

यह फैसला गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करता है। अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और सुनवाई के बाद दोनों दोषियों को मृत्युदंड दिया है। हालांकि, मौत की सजा के मामले में उच्च न्यायालय की पुष्टि और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं। मामले से संबंधित किसी भी अतिरिक्त बयान, अपील या न्यायिक आदेश को प्रकाशित करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना आवश्यक है।

FAQ

(अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रश्न 1: मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड क्या है?

उत्तर: यह सौरभ राजपूत की हत्या का मामला है, जिसमें शव को नीले प्लास्टिक के ड्रम में छिपाने का आरोप सामने आया था।

प्रश्न 2: मुस्कान और साहिल को सजा कब सुनाई गई?

उत्तर: मेरठ की अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को मृत्युदंड सुनाया।

प्रश्न 3: सौरभ राजपूत की हत्या कब हुई थी?

उत्तर: यह घटना मार्च 2025 में हुई थी।

प्रश्न 4: मामले में कितने गवाह पेश किए गए?

उत्तर: अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाह पेश किए गए और लगभग 13 महीने की सुनवाई में 126 पेशियां हुईं।

प्रश्न 5: क्या मृत्युदंड के बाद कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई?

उत्तर: नहीं। मृत्युदंड की उच्च न्यायालय से पुष्टि और लागू कानूनी प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।

मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया है।

अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया है।

अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और उच्च न्यायालय की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।