मेरठ लिसाड़ी गेट अग्निकांड
मेरठ, उत्तर प्रदेश में एक दिल दहला देने वाली त्रासदी ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के किदवई नगर, गली नंबर 1 में कपड़ा कारोबारी इकबाल (उर्फ आसिम अंसारी) के दो मंजिला मकान में सोमवार रात (23 फरवरी 2026) देर शाम भीषण आग लग गई। इस हादसे में एक ही परिवार के 6 सदस्यों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिसमें 5 मासूम बच्चे शामिल हैं। आग इतनी तेजी से फैली कि घर के अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाए। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग का मुख्य कारण बताया जा रहा है, क्योंकि घर में कपड़ों का गोदाम और टेलरिंग का काम चलता था, जिससे लपटें तेजी से भड़कीं।
घटना का पूरा विवरण
हादसा तब हुआ जब घर के मुखिया इकबाल और उनके भाई फारूक शाम की नमाज (तरावीह) पढ़ने मस्जिद गए हुए थे। घर में इकबाल की पत्नी रुखसार (30), उनकी मां आमेर बानो (55), और 5 बच्चे मौजूद थे। बच्चे खेल रहे थे और महिलाएं घरेलू काम कर रही थीं। अचानक घर के निचले हिस्से या गोदाम में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। देखते ही देखते धुआं और लपटें पूरे मकान में फैल गईं। आग ने मुख्य द्वार और सीढ़ियां ब्लॉक कर दीं, जिससे अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाए।
पड़ोसियों ने धुआं और चीखें सुनकर अलर्ट हुआ। उन्होंने दमकल विभाग को सूचना दी। दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन आग पर काबू पाने में लगभग 30 मिनट लग गए। इस दौरान स्थानीय लोगों ने छतों और खिड़कियों से कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की। कुछ महिलाओं और बच्चों ने दूसरी छत या आसपास की छतों पर कूदकर जान बचाई, लेकिन अधिकांश बुरी तरह झुलस गए। कुल 7 लोग बाहर निकाले गए, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही 6 की मौत हो गई। मरने वालों में रुखसार (पत्नी), महविश (12), हम्माद (4), अकदस (4), नबिया (4-6 महीने) और इनायत (4-6 महीने, जुड़वां बहनें) शामिल हैं। बुजुर्ग मां आमेर बानो को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
मेरठ एसएसपी अविनाश पांडे और जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। पुलिस ने बताया कि प्रथम दृष्टया शॉर्ट सर्किट से आग लगी लगती है। घर में बिजली के उपकरण और
कपड़ों की बड़ी मात्रा होने से आग तेजी से फैली। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा शोक जताया और पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद,
मुआवजा और बेहतर इलाज का निर्देश दिया। प्रशासन ने मृतकों के
परिजनों को 4 लाख रुपये तक की सहायता देने की घोषणा की है।
सामाजिक प्रभाव और सुरक्षा चिंताएं
यह त्रासदी घरेलू सुरक्षा, बिजली व्यवस्था और अग्निशमन उपकरणों की कमी पर
सवाल खड़े करती है। मेरठ जैसे घनी आबादी वाले शहरों में कपड़ा कारोबारियों के
घरों में गोदाम होने से ऐसी घटनाएं खतरनाक हो जाती हैं। पड़ोसियों ने बताया कि घर में
कोई फायर एक्सटिंग्विशर नहीं था। यह घटना परिवारों को सुरक्षा उपाय अपनाने की चेतावनी है।
पूरे इलाके में मातम का माहौल है, लोग रो-रोकर बेबस हो रहे हैं।
यह मेरठ अग्निकांड UP की सबसे दर्दनाक घरेलू आग की घटनाओं में से एक बन गया है,
जो निर्दोष बच्चों की मौत पर पूरे समाज को झकझोर रहा है।
जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का वादा किया गया है।