मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के 1468 अवैध निर्माणों
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मेरठ में हड़कंप
मेरठ में अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख व्यापारियों के लिए बड़ा झटका बन गया है। कोर्ट ने 1468 अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने का आदेश दिया है, जिसमें सेंट्रल मार्केट और आसपास की कई दुकानें शामिल हैं। व्यापारियों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से कोई अंतरिम राहत नहीं मिली। आदेश अपलोड होते ही मेरठ के व्यापारियों के चेहरे पर मायूसी छा गई। सोमवार देर रात सेंट्रल मार्केट में कई दुकानदार अपनी दुकानें हटाते नजर आए। यह दृश्य अफरा-तफरी और अनिश्चितता का प्रतीक बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माणों के खिलाफ सुनवाई के दौरान स्पष्ट आदेश दिया कि 1468 अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया जाए। इनमें मुख्य रूप से सड़क किनारे, फुटपाथ पर बनी दुकानें और व्यावसायिक निर्माण शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर अवैध कब्जा अस्वीकार्य है और नगर निगम को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ये निर्माण यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं में बाधा डाल रहे हैं। व्यापारियों की ओर से राहत की अर्जी दाखिल की गई थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। आदेश अपलोड होने के बाद मेरठ नगर निगम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
व्यापारियों की मायूसी और दुकानें हटाने की शुरुआत
आदेश की खबर फैलते ही सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों में हड़कंप मच गया। कई दुकानदारों ने तुरंत सामान पैक करना शुरू कर दिया। सोमवार देर रात दुकानदार ट्रॉली और ठेलों पर सामान लादकर ले जाते दिखे। कुछ ने कहा, “हमने सालों से यहां व्यापार किया, परिवार चलाया, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो रहा है।” एक दुकानदार ने बताया कि उन्होंने कोर्ट से राहत की उम्मीद लगाई थी, लेकिन जब आदेश अपलोड हुआ तो सब टूट गया। कई व्यापारियों ने कहा कि वैकल्पिक जगह नहीं मिलने से उनका कारोबार चौपट हो जाएगा।
सेंट्रल मार्केट पर असर
सेंट्रल मार्केट मेरठ का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, जूते-चप्पल और अन्य सामानों की दुकानें हैं। यहां हजारों परिवारों का रोजगार जुड़ा है। बुलडोजर कार्रवाई से न केवल दुकानदार प्रभावित होंगे, बल्कि आसपास के रेहड़ी-पटरी वाले और मजदूर भी बेरोजगार हो सकते हैं। व्यापारियों का कहना है कि वे नियमित टैक्स देते हैं और कई सालों से यहां हैं, लेकिन अवैध निर्माण का लेबल लगाकर सब कुछ छीन लिया जा रहा है।
नगर निगम और प्रशासन की तैयारी
मेरठ नगर निगम ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। बुलडोजर कार्रवाई से पहले नोटिस जारी किए जाएंगे। प्रशासन ने कहा कि जो लोग वैकल्पिक जगह पर शिफ्ट होना चाहते हैं, उनके लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अवैध कब्जे को हटाना जरूरी है। पुलिस भी सुरक्षा के लिए अलर्ट पर है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
व्यापारियों की मांग और भविष्य
व्यापारियों ने मांग की है कि कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए या वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए।
कई संघों ने कहा कि वे मुख्यमंत्री और
राज्य सरकार से अपील करेंगे। लेकिन फिलहाल मायूसी और अनिश्चितता का माहौल है।
यह घटना मेरठ में अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्ती का संकेत है,
लेकिन साथ ही हजारों परिवारों के भविष्य पर सवाल भी खड़े कर रही है।
राहत की उम्मीद टूट गई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मेरठ के व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिली।
सेंट्रल मार्केट में दुकानें हटाने की शुरुआत हो चुकी है।
यह स्थिति न केवल आर्थिक संकट है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर भी असर डाल रही है।
प्रशासन और कोर्ट दोनों को संतुलित तरीके से कार्रवाई करनी होगी ताकि कानून भी बचे और लोगों की रोजी-रोटी भी।
फिलहाल मेरठ में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।