मणिपुर नई सरकार
मणिपुर में नई सरकार का गठन: युमनाम खेमचंद बने मुख्यमंत्री
मणिपुर में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच युमनाम खेमचंद ने 4 फरवरी को लोक भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह फैसला BJP के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। संविधान के अनुसार, एक साल से ज्यादा राष्ट्रपति शासन नहीं चल सकता, ऐसे में BJP के लिए नई सरकार बनाना जरूरी हो गया था। युमनाम खेमचंद को सीएम चुन लिया गया, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि BJP ने उन्हें क्यों चुना और क्या वो मैतेई और कुकी समुदायों में बैलेंस बना पाएंगे। यह ब्लॉग इन सवालों का विश्लेषण करता है।
राष्ट्रपति शासन के बाद सरकार गठन की मजबूरी
13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य में राजनीतिक स्थिरता की कमी थी। संविधान की धारा 356 के तहत राष्ट्रपति शासन अधिकतम एक साल तक चल सकता है, लेकिन केंद्र सरकार ने समय से पहले नई सरकार बनाने का फैसला लिया। BJP ने युमनाम खेमचंद को सीएम बनाकर मैतेई बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। खेमचंद पूर्व में BJP के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाता है। राष्ट्रपति शासन के दौरान मैतेई-कुकी संघर्ष बढ़ा था, ऐसे में BJP को एक मजबूत नेता की जरूरत थी जो दोनों समुदायों को साथ लेकर चले।
BJP ने युमनाम खेमचंद को क्यों चुना?
BJP ने युमनाम खेमचंद को चुनने के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। सबसे पहले, खेमचंद का मैतेई समुदाय से जुड़ाव राज्य की बहुसंख्यक आबादी को संतुष्ट करता है। वे 2017 में BJP में शामिल हुए थे और 2022 विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। उनकी छवि एक सख्त और अनुभवी नेता की है, जो संघर्षरत मणिपुर में स्थिरता ला सकती है। दूसरा, राष्ट्रपति शासन के बाद BJP को केंद्र की नीतियों को लागू करने के लिए एक विश्वसनीय चेहरे की जरूरत थी। खेमचंद ने पहले भी विकास योजनाओं और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्र के साथ समन्वय किया है। तीसरा, मैतेई-कुकी तनाव को देखते हुए BJP ने एक मैतेई नेता को चुनकर मैतेई वोट बैंक को मजबूत किया, जबकि कुकी समुदाय के लिए अलग से सौदेबाजी की गुंजाइश रखी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव 2027 लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है।
मैतेई-कुकी समुदायों में बैलेंस कैसे बनेगा?
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच लंबे समय से तनाव है, जो 2023-24 में हिंसक संघर्ष में बदल गया था। युमनाम खेमचंद के सीएम बनने से मैतेई समुदाय में खुशी है, लेकिन कुकी समुदाय में चिंता है। BJP ने बैलेंस बनाने के लिए कैबिनेट में कुकी विधायकों को जगह देने की योजना बनाई है। खेमचंद ने शपथ ग्रहण के बाद कहा कि उनकी सरकार सभी समुदायों के लिए काम करेगी और संघर्ष समाप्त करने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करेगी। हालांकि, चुनौतियां हैं – कुकी समुदाय पहाड़ी इलाकों में
आरक्षण और अलग प्रशासन की मांग करता है, जबकि मैतेई मैदानी इलाकों में विकास चाहते हैं।
खेमचंद को दोनों के बीच संवाद स्थापित करना होगा,
साथ ही केंद्र की मदद से सुरक्षा बलों को मजबूत करना पड़ेगा।
अगर बैलेंस नहीं बना, तो सरकार अस्थिर हो सकती है।
नई सरकार की चुनौतियां और उम्मीदें
युमनाम खेमचंद की सरकार के सामने मुख्य चुनौती शांति स्थापित करना है।
राष्ट्रपति शासन के दौरान विकास कार्य रुके थे, अब उन्हें गति देनी होगी।
BJP की रणनीति मैतेई-कुकी बैलेंस पर टिकी है, जो राज्य की स्थिरता के लिए जरूरी है।
कुल मिलाकर, खेमचंद का चुनाव BJP की स्मार्ट राजनीति का हिस्सा है, लेकिन सफलता बैलेंस पर निर्भर करेगी।