खजनी क्षेत्र में रात के अंधेरे में मिलावटी पनीर बनाने और दिन में गोरखपुर सहित शहर के बाजारों में बेचने की समस्या अत्यंत गंभीर रूप ले चुकी है। स्थानीय दुग्ध विक्रेता और मिलावटखोर मिल्क पाउडर, फैट, स्टार्च आदि जैसे सस्ते पदार्थों का उपयोग करके बड़ी मात्रा में नकली पनीर तैयार कर रहे हैं, जिसे सुबह होते ही प्रमुख बाजारों में भेज दिया जाता है
प्रशासन ने कई बार छापेमारी कर ऐसे मिलावटी पनीर के कई नमूने जब्त किए और उनका परीक्षण कराया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि जनता स्वास्थ्य के खतरों से अनजान होकर नकली पनीर खरीद रही थी
मिलावटी पनीर की पहचान करना आम लोगों के लिए मुश्किल है, लेकिन विशेषज्ञों और खाद्य विभाग के अनुसार, असली पनीर की बनावट और स्वाद अलग होता है और नकली पनीर पानी में घुल जाता है या हाथ में लेते ही टूटकर बिखर जाता है
पनीर के सस्ते दाम, रंग-रूप और आंच पर तपने के तरीके से भी मिलावट का पता लगाया जा सकता है मिलावटी पनीर के लगातार सेवन से पेचिश, आंत-लीवर और किडनी संबंधी रोग, पेट दर्द, गैस, एसिडिटी, बच्चों में मोटापा, बुजुर्गों में ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं
त्योहारों के समय मांग बढ़ जाती है, जिससे मिलावटखोरों की सक्रियता और भी अधिक हो जाती है। प्रशासन न केवल छापे और नमूना परीक्षण करवा रहा है, बल्कि जनजागरूकता अभियान भी चला रहा है ताकि लोग सतर्क रहें और उनकी सेहत सुरक्षित रहे
खाद्य विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे शुद्धता की जांच करें, संदिग्ध दुकानों से दूर रहें और नकली पनीर की सूचना तुरंत विभाग को दें यह संपूर्ण समस्या न केवल उपभोक्ताओं की सेहत के लिए संकट है, बल्कि ईमानदार व्यापारियों के हितों का भी नुकसान करती है। सरकार व प्रशासन की सख्ती,
आम जनता की जागरूकता और श्रमिक वर्ग का सचेत व्यवहार ही मिलावटी कारोबार पर रोक लगाने के सबसे प्रभावी उपाय हैं इस विषय पर 800 वाक्य का विशिष्ट, विस्तृत हिंदी लेख तैयार करना संभव है,
जिसमें पृष्ठभूमि, समस्या का विश्लेषण, स्वास्थ्य प्रभाव, प्रशासनिक प्रयास, जांच-विधियां, उपभोक्ता अनुभव, बाजार व्यवहार, व्यापारिक प्रतिक्रिया, किसान और छोटे व्यवसायी की भूमिका, मीडिया रिपोर्ट्स, लोक-अभियान, सोशल मीडिया प्रतिक्रिया, संबंधित कानूनी प्रावधान, नीति-निर्माण, ग्रामीण समाज और शहरी उपभोक्ता, त्योहारों की चुनौतियां,
स्कूलों-कॉलेजों में जागरूकता अभियान, वैज्ञानिक रिपोर्ट, चिकित्सा विशेषज्ञ की राय, जिला और राज्य स्तरीय पहल, खाद्य निरीक्षण प्रक्रिया, उदाहरण और केस स्टडी, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोजन की शुद्धता, पत्रकारिता का योगदान, जनसंवाद, शिक्षा, समाजसेवियों की भूमिका,
भ्रष्टाचार और निगरानी तंत्र, खाद्य सुरक्षा का भविष्य आदि सभी पहलुओं को विस्तार से लिखा जा सकता है।अगर आपको किसी विशेष बिंदु वाली लेखन-शैली, संदर्भ या फॉर्मेट की आवश्यकता है, कृपया स्पष्ट करें — ताकि आपकी फिशरमैन इंडिया चैनल या किसी अन्य प्लेटफॉर्म की जरूरत के अनुसार लेख तैयार किया जा
सके खजनी क्षेत्र में मिलावटी पनीर का धंधा, स्थानीय समाज और प्रशासन के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका है। रात के अंधेरे में नकली पनीर का उत्पादन होता है और दोपहर होते-होते वे शहर के बाजारों में सप्लाई कर दी जाती है, जिससे उपभोक्ताओं को कई स्वास्थ्य संबंधी खतरे उठाने पड़ रहे हैं
शुरूआत: ग्रामीण क्षेत्र से शहर तकखजनी और आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में दूध उत्पादन और उससे जुड़ा कारोबार होता है। इन इलाकों में कुछ असामाजिक तत्व मिलावट का नया तरीका अपना रहे हैं। वे मिल्क पाउडर, वनस्पति तेल, डिटर्जेंट, स्टार्च और अन्य केमिकल की मदद से नकली पनीर बनाते हैं,
ताकि लागत कम और मुनाफा ज्यादा हो पनीर बनने की प्रक्रियाइन मिलावटखोरों की फैक्ट्री में दूध की जगह सस्ता मिल्क पाउडर, वनस्पति घी, स्टार्च और अकसर डिटर्जेंट मिलाकर तैयार किया जाता है। यह पनीर दिखने में तो आकर्षक और सफेद लगता है,
लेकिन असलियत में उसमें घातक पदार्थ होते हैं रात में इसका उत्पादन होता है, सुबह या दोपहर में वह बड़ी दुकानों तक पहुंच जाता है पहचान के तरीकेमिलावटी पनीर की पहचान करना आसान नहीं, मगर विशेषज्ञों के मुताबिक:असली पनीर गाढ़ा, दानेदार और आसानी से न टूटने वाला होता है
।नकली पनीर का रंग अतिसफेद या कुछ अलग दिखता है।पानी में डालने पर पनीर जल्दी घुल जाता है।हाथ में लेते ही टूट जाता है।इन टिप्स से ग्राहक कुछ हद तक नकली पनीर पकड़ सकते हैं स्वास्थ्य पर असरमिलावटी पनीर से पेट संबंधी रोग, आंत-लीवर की समस्या, किडनी खराब होना, अम्लता, फैटी लीवर, त्वचा रोग, बच्चों में मोटापा, बुजुर्गों में बीपी बढ़ना, आदि खतरे बढ़ सकते हैं
यह धीमा जहर है और लंबे समय तक इसके सेवन से गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं प्रशासन की कार्रवाईखाद्य विभाग व स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। हाल ही में खलीलाबाद में एक क्विंटल 40 किलो नकली पनीर जब्त हुआ, जिसके नमूने जांच के लिए भेजे गए जाँच में पुष्टि हुई कि यह पनीर खाने योग्य नहीं था प्रशासन ने सख्त कार्रवाई के लिए मिलावटखोरों पर मुकदमा दर्ज कर उनकी फैक्ट्री सील कर दी जन-जागरूकता और बचावत्योहार के समय बाजारों में नकली पनीर की खपत तेजी से बढ़ जाती है
प्रशासन और मीडिया लोगों को बार-बार आगाह कर रहे हैं कि वे सिर्फ विश्वसनीय दुकानों से ही पनीर खरीदें संदिग्ध स्थिति में तुरंत खाद्य विभाग को सूचना दें निष्कर्षखजनी क्षेत्र की यह समस्या हर उपभोक्ता, किसान और दुकानदार को प्रभावित कर रही है। जनता की रक्षा के लिए प्रशासन, मीडिया और आम लोगों को मिलकर मुहिम चलानी होगी