पूर्वांचल राज्य की मांग क्यों है अति आवश्यक? फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद की अपील
पूर्वांचल क्षेत्र, जो उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में फैला हुआ है, सदियों से अपनी अलग सांस्कृतिक, भाषाई और आर्थिक पहचान रखता आया है। गोरखपुर, आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर, मऊ, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, जौनपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बस्ती और श्रावस्ती जैसे जिलों को मिलाकर बने इस क्षेत्र की जनता लंबे समय से पूर्वांचल राज्य की मांग कर रही है। फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चंद्रभान निषाद ने माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, गृह मंत्री अमित शाह जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से आग्रह किया है कि पूर्वांचल को पूर्ण राज्य का दर्जा देकर इसकी जनता को उनके हक और अधिकार दिलाए जाएं। पूर्वांचल की सदियों पुरानी अलग पहचान को सम्मान देते हुए इसकी स्थापना जल्द होनी चाहिए, क्योंकि यह न केवल विकास की गति बढ़ाएगी बल्कि क्षेत्रीय असंतुलन को भी दूर करेगी।
पूर्वांचल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अलगावता: राज्य गठन का मजबूत आधार
*पूर्वांचल का इतिहास प्राचीन काल से ही बौद्ध और जैन संस्कृति का केंद्र रहा है। भगवान बुद्ध के निर्वाण स्थल कुशीनगर से लेकर भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या तक, यह क्षेत्र सांस्कृतिक धरोहरों से भरा पड़ा है। पूर्वांचल राज्य की मांग का आधार यही है कि यह क्षेत्र भोजपुरी, अवधी और ब्रज जैसी बोलियों का गढ़ है, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हिंदी से भिन्न है। ब्रिटिश काल में पूर्वांचल को अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में देखा जाता था, लेकिन स्वतंत्र भारत में इसे मुख्य उत्तर प्रदेश में विलय कर दिया गया। नतीजा? विकास का असमान वितरण। आज पूर्वांचल के लोग गरीबी, बेरोजगारी और बाढ़ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। चंद्रभान निषाद जैसे नेताओं का मानना है कि
पूर्वांचल अलग राज्य बनने से स्थानीय मुद्दों पर फोकस बढ़ेगा, जैसे गंगा-गोमती बाढ़ नियंत्रण और मत्स्य पालन उद्योग का विकास। फिशरमैन आर्मी जैसे संगठन नदी-किनारे बसे निषाद समाज की आवाज उठा रहे हैं, जो पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
आर्थिक पिछड़ापन और विकास की बाधाएं: पूर्वांचल राज्य गठन से समाधान
उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल सबसे गरीब क्षेत्र है। यहां प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से 30% कम है। पूर्वांचल राज्य बनाओ की मांग इसलिए मजबूत है क्योंकि लखनऊ-आगरा केंद्रित विकास पूर्वांचल को उपेक्षित रखता है। गोरखपुर मंडल में औद्योगिकरण नाममात्र का है, जबकि चाइना बॉर्डर पर स्थित सोनभद्र में कोयला और हीरा भंडार बेकार पड़े हैं। पूर्वांचल राज्य की स्थापना से स्थानीय सरकार गठन होगा, जो पर्यटन (बौद्ध सर्किट), कृषि (धान-गन्ना) और मत्स्य उद्योग को बढ़ावा देगी। चंद्रभान निषाद ने कहा, “पूर्वांचल की जनता को उनके हक और अधिकार मिलने चाहिए।” राज्य गठन से रोजगार सृजन होगा, प्रवासन रुकेगा और जीडीपी में योगदान बढ़ेगा। झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे नए राज्यों ने साबित किया है कि क्षेत्रीय राज्य विकास का रोडमैप हैं।
राजनीतिक अपील: राष्ट्रपति से पीएम तक, पूर्वांचल राज्य के लिए एकजुट आवाज
श्री चंद्रभान निषाद, फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ने माननीय राष्ट्रपति महोदया से अपील की है कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत पूर्वांचल को राज्य का दर्जा दें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से आग्रह है कि
पूर्वांचल को पूर्वोत्तर राज्यों की तरह विशेष पैकेज दें। गृह मंत्री अमित शाह जी से
राज्य पुनर्गठन आयोग गठित करने की मांग है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी,
जो स्वयं गोरखपुर से हैं, पूर्वांचल के दर्द को समझते हैं।
योगी सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बनाया, लेकिन पूर्ण राज्य ही स्थायी समाधान है।
पूर्वांचल की 10 करोड़ जनता भाजपा को समर्थन देगी यदि उनकी मांग पूरी हो। यह मांग विपक्ष से परे है—
सपा, बसपा सभी ने कभी न कभी समर्थन दिया।
पूर्वांचल राज्य गठन के फायदे
- जनता के हक और अधिकारों की रक्षा
- स्थानीय भाषा में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर
- निषाद, यादव, कुर्मी जैसे समुदायों को आरक्षण और योजनाओं का सीधा लाभ
- पर्यावरणीय मुद्दों जैसे गंगा सफाई पर फोकस बढ़ेगा
चंद्रभान निषाद की अगुवाई में फिशरमैन आर्मी ने हजारों हस्ताक्षर जुटाए हैं। यह आंदोलन शांतिपूर्ण है लेकिन दृढ़।
केंद्र सरकार को अवसर है कि पूर्वांचल को राज्य का दर्जा देकर एकता का संदेश दे।
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