गोरखनाथ मंदिर में मछुआ समुदाय से महत्वपूर्ण भेंट
आज, 24 फरवरी 2026 को गोरखनाथ मंदिर स्थित मेरे कार्यालय में विभिन्न जनपदों से आए समाजबंधुओं, विशेष रूप से मछुआ समुदाय और मत्स्य पालकों से एक महत्वपूर्ण भेंट हुई। यह भेंट उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर आयोजित की गई थी, जिसमें सभी उपस्थित भाइयों को इन योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। गोरखनाथ मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर यह आयोजन होने से समाजबंधुओं में उत्साह का संचार हुआ और उन्होंने सक्रिय रूप से भागीदारी की। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मत्स्य विभाग की ये योजनाएं मछुआ समुदाय के आर्थिक उत्थान और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन की गई हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से सैकड़ों मछुआरा भाई पहुंचे
पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों जैसे वाराणसी, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर और गोरखपुर आदि से सैकड़ों मछुआरा भाई पहुंचे। इनमें युवा मत्स्य पालक, पारंपरिक मछुआरे और महिला स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधि शामिल थे। भेंट के दौरान सभी ने अपने अनुभव साझा किए, जैसे तालाबों में मत्स्य पालन की चुनौतियां, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान और बाजार संबंधी समस्याएं। मैंने व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक से बातचीत की और उनकी समस्याओं का समाधान बताते हुए विभाग की योजनाओं से जोड़ने का आश्वासन दिया। यह भेंट न केवल जानकारी का आदान-प्रदान थी, बल्कि एक पारिवारिक मिलन जैसी रही, जहां चाय-पानी के साथ मछली पालन की सफल कहानियां भी साझा की गईं। इससे मछुआ समुदाय में विश्वास बढ़ा और वे अधिक उत्साहित दिखे।
उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं
उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग द्वारा संचालित योजनाएं मछुआ समुदाय के लिए वरदान साबित हो रही हैं। सबसे प्रमुख है प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), जो 20,050 करोड़ रुपये की केंद्र प्रायोजित योजना है। इसके तहत तालाब निर्माण, बीज मछली उपलब्धता, फीड मिल स्थापना और निर्यात को बढ़ावा दिया जाता है। उत्तर प्रदेश में इस योजना से 2025 तक 5 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे मछली उत्पादन दोगुना हो सके। योजना के लाभार्थी मछुआरों को 40-60% सब्सिडी पर पॉलीकुल्चर तालाब, बायोफ्लॉक तकनीक और रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) की सुविधा मिलती है।
इसके अलावा, मत्स्य बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं में नुकसान पर 3 लाख रुपये तक का बीमा कवर उपलब्ध है, जो मछुआरों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। राष्ट्रीय मत्स्य बीमा योजना में भी नामांकन कराया गया, जहां वार्षिक प्रीमियम मात्र 500-1000 रुपये में लाखों का कवर मिलता है। विभाग द्वारा मत्स्य वित्तीय सहायता योजना चलाई जा रही है, जिसमें KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) पर 2% ब्याज छूट और 5 लाख तक का ऋण उपलब्ध है। महिला मछुआरों के लिए महिला मत्स्य स्वयं सहायता समूह योजना विशेष है, जो प्रशिक्षण, उपकरण और बाजार लिंकेज प्रदान करती है। हाल ही में शुरू प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर लाभ लिया जा सकता है।
मछुआ समुदाय के लिए विशेष लाभ और आह्वान
भेंट में उपस्थित मत्स्य पालकों को बताया गया कि हैचरी स्थापना पर 50% सब्सिडी और फिंगरलिंग्स ट्रांसपोर्ट पर मुआवजा उपलब्ध है। कोविड के बाद शुरू वन स्टॉप सेंटर से बीज, फीड और दवा एक ही जगह मिलती है। उत्तर प्रदेश में 2025 तक 2 लाख मछुआरों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है, जिसमें जैविक मत्स्य पालन, रोग प्रबंधन और डिजिटल मार्केटिंग शामिल है।
विशेष रूप से गंगा बेसिन क्षेत्र के मछुआरों के लिए गंगा मत्स्य संरक्षण योजना चल रही है,
जो लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने पर फोकस करती है। लाभ लेने के लिए
आधार कार्ड से ऑनलाइन पंजीकरण nfdb.gov.in या upfisheries.com पर किया जा सकता है।
विभाग की मोबाइल ऐप से स्टॉक मॉनिटरिंग और मौसम अलर्ट भी मिलते हैं।
मैंने सभी समाजबंधुओं से आह्वान किया कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
तालाब मालिक बने, समूह बनाकर सब्सिडी लें और डिजिटल टूल्स अपनाएं।
सफल उदाहरण के रूप में वाराणसी के एक मछुआरे का जिक्र किया,
जिन्होंने PMMSY से 10 तालाब बनाकर वार्षिक 20 लाख की कमाई शुरू की।
आह्वान पर सभी ने तालियां बजाईं और पंजीकरण का वचन दिया।
विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने स्पॉट पर फॉर्म भरने में मदद की।
यह भेंट समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई।
भविष्य में ऐसी और भेंट आयोजित की जाएंगी। मछुआ भाइयों से अपील है- जागो, जुड़ो और समृद्ध बनो!