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मेडिकल कॉलेजों में बड़ा खुलासा: SC-ST को 23% की जगह मिला 78% आरक्षण, पिछड़े व सामान्य वर्ग से हो रही अनदेखी
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों – कानपुर, अंबेडकरनगर, जालौन और सहारनपुर – में आरक्षण व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को मिलने वाले 23% आरक्षण की जगह 78% सीटें दे दी गईं। वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य वर्ग के हिस्से की सीटें काफी हद तक प्रभावित हो गई हैं।
कॉलेजों में सीटों का बंटवारा
एमबीबीएस के लिए इन मेडिकल कॉलेजों में 100-100 सीटें हैं। इसमें से 15% सीटें केंद्र के कोटे की होती हैं, जबकि 85 सीटें राज्य सरकार के कोटे से भरी जाती हैं। इन्हीं 85 सीटों में 78% सीटें SC-ST वर्ग को दे दी गईं।
👉 उदाहरण के लिए देखें:
अंबेडकरनगर मेडिकल कॉलेज – 85 सीटों में से 62 सीटें SC, 5 सीटें ST और केवल 7 सीटें सामान्य वर्ग को मिलीं, जबकि OBC को सिर्फ 11 सीटें दी गईं।
यही हाल कानपुर, जालौन और सहारनपुर मेडिकल कॉलेजों में भी रहा।
कुल मिलाकर चारों कॉलेजों की 340 सीटों में से 248 सीटें SC को, 20 सीटें ST को, 44 सीटें OBC को और केवल 28 सीटें सामान्य वर्ग को दी गईं।
क्या कहते हैं नियम?
आरक्षण के मौजूदा नियम के अनुसार –
अनुसूचित जाति: 21%
अनुसूचित जनजाति: 2%
अन्य पिछड़ा वर्ग: 27%
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 10%
लेकिन मेडिकल कॉलेजों में EWS का कोटा लागू ही नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि SC-ST को 23% की जगह सीधे 78% सीटें मिल गईं, और सामान्य व पिछड़े वर्ग के छात्रों के अधिकार प्रभावित हो गए।
मामला अब अदालत में
2025 की शुरुआत में हाईकोर्ट ने इस आरक्षण पद्धति को रद्द कर दिया और कहा कि नियमों के हिसाब से सीटों का बंटवारा होना चाहिए। हालांकि, चिकित्सा शिक्षा विभाग इस आदेश के खिलाफ पुनः अपील की तैयारी में जुटा है।
अगर विभाग की अपील खारिज होती है, तो मेडिकल कॉलेजों में भविष्य में आरक्षण का बंटवारा तय नियमों के मुताबिक ही करना होगा।
बड़ा सवाल
आखिर वर्षों से मेडिकल कॉलेजों में यह गड़बड़ी क्यों जारी रही?
EWS का कोटा लागू क्यों नहीं किया गया?
और जिन छात्रों का हक मारा गया, उनकी भरपाई कैसे होगी?
यह सवाल अब राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग के सामने खड़े हैं।
👉 यह रिपोर्ट “फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज” की पड़ताल पर आधारित है।
