लखनऊ पेशाब कांड: दलित विरोधी सोच पर देशभर में आक्रोश, चंद्रशेखर आज़ाद ने की सख्त कार्रवाई की मांग
लखनऊ में हाल ही में सामने आए “पेशाब कांड” ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना न सिर्फ अमानवीय बल्कि दलित समाज के खिलाफ फैली गहराई तक जड़ें जमा चुकी भेदभावपूर्ण मानसिकता का आईना बन गई है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक जनता में भारी गुस्सा दिख रहा है। दलित समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्षरत आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने इस मामले पर सख्त नाराज़गी जताते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
लखनऊ के एक इलाके में एक पुलिस रिपोर्ट के अनुसार एक युवक पर आरोप है कि उसने एक दलित व्यक्ति के ऊपर जानबूझकर पेशाब कर दिया। यह घटना इतनी शर्मनाक थी कि वहां मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया और देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
जनता का आक्रोश और दलित समाज की प्रतिक्रियायह घटना दलित समुदाय के बीच गुस्से की लहर ले आई है। लोग इसे सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक मानसिकता की उपज मान रहे हैं जो आज भी समाज के कुछ वर्गों में दलितों को नीचा दिखाने की कोशिश करती है। समाज के विभिन्न संगठनों और कार्यकर्ताओं ने लखनऊ प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक को इस घटना पर जवाबदेह ठहराया है।
चंद्रशेखर आज़ाद की सख्त प्रतिक्रियादलित अधिकारों की लड़ाई के अग्रणी नेता चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ ने इस घटना को दलितों के खिलाफ घृणा और भेदभाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अगर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो यह देशभर में जातीय असमानता को और भड़का सकता है। उन्होंने सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखीं
लखनऊ पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लेने की बात कही है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस घटना पर रिपोर्ट तलब की है। वहीं विपक्षी दलों ने इसे उत्तर प्रदेश में बढ़ती जातीय अन्यायपूर्ण घटनाओं से जोड़ते हुए सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सरकार और प्रशासन दोनों की सामाजिक सोच की परीक्षा लेती हैं। यदि कार्रवाई में देरी होती है, तो यह संदेश जाता है कि समाज के कमजोर वर्गों की पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।