एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोक
लखनऊ में व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति पर हाल ही में लगाई गई रोक ने शहर में खाने-पीने के संकट की स्थिति पैदा कर दी है। इस फैसले से स्ट्रीट फूड वेंडर, छोटे रेस्टोरेंट, ढाबा संचालक और टिफिन सर्विस वाले सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। इन व्यवसायों पर निर्भर करीब पांच लाख से ज्यादा आबादी के सामने एक-दो दिन में ही खाने का संकट खड़ा हो सकता है।
रोक का कारण और प्रभावित क्षेत्र
व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोक लगाने का फैसला घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने और कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। लेकिन राजधानी लखनऊ जैसे बड़े शहर में जहां लाखों लोग बाहर से आकर रहते हैं, इसका असर बहुत गहरा पड़ रहा है। छोटे ढाबे, चाय की दुकानें, मोमोज, चाट-पकौड़ी, फास्ट फूड स्टॉल और टिफिन सर्विस वाले अधिकांश व्यावसायिक सिलिंडरों पर ही निर्भर हैं। इनके पास स्टॉक रखने की क्षमता सीमित होती है—ज्यादातर 2-4 सिलिंडर ही रख पाते हैं, जो 1-2 दिन में खत्म हो जाते हैं।
कौन-कौन प्रभावित हो रहा है?
- स्ट्रीट फूड वेंडर: चाट, समोसा, जलेबी, पानिपुरी, भेलपुरी जैसे स्टॉल पूरी तरह व्यावसायिक सिलिंडरों पर चलते हैं। इनकी संख्या लखनऊ में हजारों में है।
- छोटे रेस्टोरेंट और ढाबे: गोमती नगर, चारबाग, हजरतगंज, आलमबाग, इंदिरानगर जैसे इलाकों में सैकड़ों ढाबे और छोटे होटल हैं जो रोजाना सैकड़ों लोगों को खाना परोसते हैं।
- टिफिन सर्विस: नौकरीपेशा लोग और छात्रों के लिए टिफिन बहुत महत्वपूर्ण है। ये सर्विसेज भी व्यावसायिक गैस पर चलती हैं।
- बाहर से आने वाले लोग: लखनऊ में बड़ी संख्या में नौकरीपेशा, छात्र और प्रवासी मजदूर हैं। यहां 25 हजार से ज्यादा विद्यार्थी बाहर से पढ़ने आते हैं, जो ज्यादातर बाहर का खाना खाते हैं।
इन सभी पर निर्भर आबादी 5 लाख से ज्यादा बताई जा रही है। यदि आपूर्ति नहीं हुई तो
ये लोग घरों में खाना नहीं बना पाएंगे और भोजन की तलाश में परेशान होंगे।
शहर की स्थिति और लोगों की चिंता
लखनऊ में बड़ी संख्या में माइग्रेंट वर्कर, छात्र और प्रोफेशनल्स हैं जो
घरेलू कुकिंग नहीं करते। वे सुबह-शाम बाहर से खाना खाते हैं। रोक के कारण कई वेंडर पहले से ही
सिलिंडर खत्म होने की शिकायत कर रहे हैं। कुछ ने घरेलू सिलिंडर
इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन यह गैरकानूनी है और जुर्माना भी लग सकता है।
स्ट्रीट फूड एसोसिएशन और ढाबा ओनर्स ने प्रशासन से जल्द राहत देने की मांग की है।
क्या है आगे का रास्ता?
प्रशासन का कहना है कि यह रोक अस्थायी है और घरेलू उपभोक्ताओं की
जरूरतें पूरी करने के बाद व्यावसायिक आपूर्ति बहाल की जाएगी। लेकिन फिलहाल शहर में खाने की
दुकानों पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोक लंबी चली तो
महंगाई बढ़ेगी और कई छोटे व्यवसाय बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
लखनऊ जैसे शहर में जहां स्ट्रीट फूड और छोटे ढाबे रोजगार और भोजन का मुख्य स्रोत हैं,
व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति रोकना एक गंभीर मुद्दा बन गया है।
प्रशासन को जल्द ही संतुलित नीति अपनानी होगी ताकि आम आदमी का खाना प्रभावित न हो
