लखनऊ हजरतगंज
लखनऊ में फिल्म “घूसखोर पंडत” पर बवाल
राजधानी लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में फिल्म घूसखोर पंडत के निर्देशक व उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। निर्देशक के खिलाफ जातिगत भावनाएं आहत करने व सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह मामला तब सामने आया जब फिल्म के कंटेंट और टाइटल को लेकर विभिन्न समुदायों में नाराजगी फैली। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म का नाम और उसका प्रचार सामग्री ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है, जिससे जातिगत तनाव बढ़ सकता है।
एफआईआर में क्या-क्या आरोप?
एफआईआर में मुख्य रूप से दो बड़े आरोप लगाए गए हैं:
- जातिगत भावनाएं आहत करना – फिल्म के टाइटल “घूसखोर पंडत” को ब्राह्मण समाज के खिलाफ अपमानजनक बताया जा रहा है।
- सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश – कथित तौर पर फिल्म के माध्यम से समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास किया गया।
हजरतगंज पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और निर्देशक व टीम से पूछताछ की जा सकती है।
फिल्म “घूसखोर पंडत” क्या है?
फिल्म “घूसखोर पंडत” एक व्यंग्यात्मक या सामाजिक ड्रामा बताई जा रही है,
जो कथित तौर पर भ्रष्टाचार और समाज में व्याप्त कुछ रूढ़ियों पर टिप्पणी करती है।
हालांकि, टाइटल और कुछ दृश्यों को लेकर विवाद बढ़ गया है। फिल्म अभी रिलीज से
पहले ही विवादों में घिर गई है, जिससे इसके प्रमोशन और रिलीज पर असर पड़ सकता है।
समाज में प्रतिक्रिया और आगे क्या?
इस घटना ने लखनऊ में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की
स्वतंत्रता का मामला मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज करने का आश्वासन दिया है।
यदि आरोप साबित हुए तो निर्देशक और टीम पर सख्त कार्रवाई हो सकती है,
वहीं फिल्म के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।