धुरियापार में श्री चतुर्भुजी नाथ मंदिर

धुरियापार में माहौल गर्म: ग्रामीण सड़कों पर उतरे
गोरखपुर जिले के धुरियापार गांव में स्थित प्राचीन श्री चतुर्भुजी नाथ मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। पिछले दो वर्षों से शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे ग्रामवासी अब सड़कों पर उतर आए हैं। ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और भूमाफियाओं के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप है कि मंदिर के सहन, बाग और फुलवारी की जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व: 1938 में हुई स्थापना
श्री चतुर्भुजी नाथ मंदिर की स्थापना वर्ष 1938 में हुई थी। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के पश्चिम तरफ कुआनो नदी के बजर घट्टा घाट पर मिट्टी की खुदाई के दौरान एक कुदाल पथरील चीज से टकराई। खुदाई से निकली गुप्तकालीन कसौटी पत्थर की चतुर्भुजी नाथ की मूर्ति मिली। तत्कालीन जिला प्रशासन, गोपालपुर स्टेट और बढ़या स्टेट के राजा ने मूर्ति अपने पास ले जाना चाहा, लेकिन धुरियापार के हिंदू और मुस्लिम एकजुट हो गए। सभी ने मिलकर मूर्ति को गांव में ही स्थापित किया और 1938 में चतुर्भुजी नाथ मंदिर का निर्माण हुआ।
वर्ष 1987 में 23 जनवरी को मंदिर से मूल मूर्ति चोरी हो गई। उस समय लोगों ने इसे अष्टधातु की मूर्ति बताया था, जिसकी चर्चा देश-विदेश तक हुई, लेकिन मूर्ति आज तक बरामद नहीं हुई। वर्तमान में मंदिर में प्रतिस्थापित मूर्ति है, लेकिन पुरानी मूर्ति की चोरी आज भी गांव की पीड़ा बनी हुई है।

अतिक्रमण और भूमाफियाओं का खेल: डेमोग्राफी बदलने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से भूमाफियाओं ने मंदिर की सहन, बाग और फुलवारी की जमीन पर अवैध कब्जा शुरू कर दिया है। आरोप है कि एक भूमाफिया ने मंदिर के पीछे की जमीन खरीदकर उसकी प्लाटिंग शुरू की है। आबादी होने और मुख्य मार्ग पर जाने का कोई रास्ता न होने के कारण मंदिर की जमीन को अवैध रूप से रास्ता बनाकर बेचने-खरीदने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि यह सब गांव की डेमोग्राफी बदलने और बाहरी लोगों को बसाने की साजिश है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुलिस प्रशासन द्वारा मना करने के बावजूद अतिक्रमणकारी हावी हैं। कुछ प्रशासनिक कर्मचारी भूमाफियाओं से साठगांठ कर अतिक्रमण में मदद कर रहे हैं। ग्रामीण पिछले दो साल से उपजिलाधिकारी गोला, एसएसपी गोरखपुर, जिलाधिकारी गोरखपुर, मंडल आयुक्त और मुख्यमंत्री जनता दरबार तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों की मांग: निष्पक्ष जांच और जमीन मुक्त कराना
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मंदिर की भूमि पर निष्पक्ष जांच हो और
अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
वे चाहते हैं कि मंदिर की सहन, बाग और फुलवारी की जमीन को पूरी
तरह मुक्त कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह आस्था और
कानून बनाम भूमाफियाओं की लड़ाई है, और अब प्रशासन के लिए यह परीक्षा का समय है।
प्रशासन पर दबाव बढ़ा: क्या होगी कार्रवाई?
यह मामला अब गोरखपुर जिले में चर्चा का विषय बन चुका है। मंदिर की प्राचीनता और
गांव की एकता को देखते हुए ग्रामीणों की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदर्शन और तेज हो सकता है।
ग्रामीणों का एकजुट होना और हिंदू-मुस्लिम एकता का इतिहास इस मामले को और संवेदनशील बनाता है।
अब सभी की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या मंदिर की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त
कराया जाएगा या यह लड़ाई लंबी चलेगी।