लाल बारादरी विवाद
छात्रों का प्रशासनिक भवन घेराव
लखनऊ विश्वविद्यालय में लाल बारादरी भवन को लेकर छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।
समाजवादी छात्र सभा और NSUI के कार्यकर्ताओं ने लविवि प्रशासनिक भवन का घेराव कर दिया।
उनकी मुख्य मांग है कि जर्जर लाल बारादरी भवन को तत्काल खोला जाए और छात्रों के उपयोग के लिए सुरक्षित बनाया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।
प्रशासन का पक्ष और चेतावनी बोर्ड
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने लाल बारादरी को क्षतिग्रस्त और असुरक्षित घोषित किया है।
भवन की दीवारें कमजोर होने और छत गिरने का खतरा बताया गया है।
इसके लिए भवन के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि भवन को खोलना छात्रों और संपत्ति के लिए जोखिम भरा होगा।
मरम्मत के लिए बजट और योजना बनाई जा रही है।
एबीवीपी भी मैदान में उतरी
प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ता भी विरोध में उतर आए।
उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
एबीवीपी ने कहा कि लाल बारादरी का मुद्दा छात्र हित से ज्यादा राजनीति का खेल बन गया है।
दोनों छात्र संगठनों के बीच नारेबाजी और बहस हुई।
पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए भारी बल तैनात किया।
लाल बारादरी का ऐतिहासिक महत्व
लाल बारादरी लखनऊ विश्वविद्यालय का एक पुराना और ऐतिहासिक भवन है।
यह छात्रों के लिए सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
छात्र इसे बंद होने से नाराज हैं और इसे अपनी विरासत मानते हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भवन की मरम्मत कर इसे सुरक्षित बनाया जा सकता है।
प्रदर्शन की वजह और मांगें
छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन भवन को जानबूझकर बंद रख रहा है।
उन्होंने मांग की कि तत्काल मरम्मत शुरू हो और भवन खोला जाए।
समाजवादी छात्र सभा और NSUI ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया।
वे लंबे समय से इस मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं।
प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा सर्वोपरि है।
स्थिति और आगे की संभावनाएं
घेराव के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कराई।
प्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया कि जल्द ही मरम्मत की योजना पर काम शुरू होगा।
लेकिन छात्र अभी भी सख्त रुख पर अड़े हैं।
यह विवाद लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति को गरमा सकता है।
दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
स्थानीय लोग और पूर्व छात्र भी मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं।
लाल बारादरी का मामला अब सिर्फ भवन का नहीं रहा।
यह छात्रों के अधिकार, विरासत संरक्षण और प्रशासन की जवाबदेही का प्रतीक बन गया है।
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