परियोजना की शुरुआत और लंबी प्रतीक्षा की कहानी
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लाखों निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। 48 साल पुरानी महत्वाकांक्षी उत्तराखंड-यूपी पानी परियोजना (जमरानी बांध परियोजना) ने आखिरकार तेज रफ्तार पकड़ ली है। 1976 में शिलान्यास हुई यह योजना लंबे समय से विभिन्न कारणों से अटकी रही, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों, हालिया बजट प्रावधानों और इंजीनियरिंग चुनौतियों के समाधान से अब निर्माण कार्य जोरों पर है। गौला नदी पर बन रही यह बहुउद्देशीय परियोजना पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए वरदान साबित होगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 48 साल की देरी के कारण
परियोजना की नींव 1976 में पड़ी थी, लेकिन भू-राजनीतिक विवाद, फंडिंग की कमी, पर्यावरणीय मंजूरी और उत्तराखंड के अलग राज्य गठन (2000) के बाद भी प्रगति धीमी रही। लंबे इंतजार के बावजूद, हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमिटी ने हजारों करोड़ का विशेष पैकेज मंजूर किया। इससे 48 साल बाद परियोजना को मिली रफ्तार संभव हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत की प्रमुख इंटर-स्टेट जल परियोजनाओं में से एक है, जो क्षेत्रीय जल असंतुलन को दूर करेगी।
परियोजना का दायरा: कितने लोग लाभान्वित होंगे?
यह परियोजना 10 जिलों को कवर करेगी, जहां 50 लाख से अधिक आबादी रहती है। मुख्य लाभार्थी क्षेत्र:
- हरिद्वार और ऋषिकेश: 10 लाख ग्रामीणों को प्रतिदिन पर्याप्त पानी।
- सहारनपुर और मेरठ: शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी आपूर्ति।
- देहरादून घाटी: पर्यटन प्रभावित इलाकों में पाइपलाइन विस्तार।
- पीलीभीत और लखीमपुर: सीमावर्ती गांवों में नई कैनालें।
प्रतिदिन सैकड़ों मिलियन लीटर पानी उपलब्ध होगा, जिससे सूखे प्रभावित क्षेत्रों में जल स्तर 30% तक बढ़ेगा। इससे लाखों लोगों की प्यास बुझेगी और कृषि मजबूत होगी।
तकनीकी विशेषताएं और नवाचार
परियोजना में 350 किमी मुख्य कैनाल, 500 सब-कैनालें और 1000 पंपिंग स्टेशन शामिल हैं। आधुनिक तकनीक जैसे IoT-आधारित मॉनिटरिंग, सोलर-पावर्ड पंप और ड्रिप इरिगेशन से जल संरक्षण सुनिश्चित होगा। पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA) के तहत वन क्षेत्रों में न्यूनतम कटाई की गई है। निर्माण कार्य अब 70% से अधिक पूरा हो चुका है, और अगले दो-तीन वर्षों (2029 तक) में पूर्ण रूप से चालू होने की उम्मीद है।
लाभ और आर्थिक प्रभाव
- पेयजल और सिंचाई: दोहरी फसल संभव, GDP में योगदान बढ़ेगा।
- रोजगार सृजन: निर्माण चरण में 50,000 प्रत्यक्ष नौकरियां, 1 लाख अप्रत्यक्ष।
- महिला सशक्तिकरण: गांवों में वाटर कमेटियां गठित।
- स्वास्थ्य सुधार: डायरिया जैसी बीमारियां 40% कम होंगी।
- SDG लक्ष्य: स्वच्छ जल (SDG 6) को पूरा करने में मील का पत्थर।
यह परियोजना क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देगी और लाखों परिवारों का जीवन बदल देगी।
चुनौतियां और समाधान
भूमि अधिग्रहण, बाढ़ जोखिम जैसी चुनौतियां रहीं, लेकिन डिजिटल सर्वे, मुआवजा पैकेज और मजबूत इंजीनियरिंग से इन्हें हल किया गया। स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्रीय असंतुलन दूर करेगी।