कोटद्वार में बजरंग दल से भिड़ंत
कोटद्वार में धार्मिक सद्भाव पर सवाल
उत्तराखंड के कोटद्वार में हाल ही में एक घटना ने सुर्खियां बटोरी, जिसमें एक व्यक्ति मोहम्मद दीपक बजरंग दल कार्यकर्ताओं से भिड़ गया। मामला एक मुस्लिम दोस्त की दुकान से जुड़ा था, जिसे बचाने के लिए दीपक ने विरोध किया। इस घटना के बाद पुलिस की एंट्री हुई और मामला कानूनी दायरे में पहुंच गया। अब मोहम्मद दीपक ने अपना पक्ष रखते हुए पूरा सच बताया है कि उस दिन क्या हुआ और क्यों विवाद बढ़ा। यह घटना साम्प्रदायिक सद्भाव और दोस्ती के नाम पर उठे विवाद का उदाहरण बन गई है।
घटना की पूरी पृष्ठभूमि
कोटद्वार के एक व्यस्त बाजार में मोहम्मद दीपक का मुस्लिम दोस्त कई सालों से छोटी सी दुकान चला रहा था। दुकान पर कुछ स्थानीय लोगों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि दुकान अवैध तरीके से चल रही है या कुछ नियमों का उल्लंघन हो रहा है। दीपक के अनुसार, यह आपत्ति केवल बहाना थी और असल मकसद दुकान बंद करवाना था।
एक दिन बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता दुकान पर पहुंचे और दुकानदार से बात करने लगे। बात बढ़ने पर दीपक ने हस्तक्षेप किया। उसने कहा कि उसका दोस्त निर्दोष है और दुकान वैध तरीके से चल रही है। इसी बात पर बहस तेज हो गई और दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। दीपक ने बताया कि उसने दोस्त की रक्षा के लिए आवाज उठाई, क्योंकि वह सालों से उसे जानता है और दोनों में गहरी दोस्ती है।
पुलिस एंट्री और मामला गरमाया
विवाद बढ़ने पर आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को अलग किया। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने दीपक पर मारपीट और उकसावे का आरोप लगाया, जबकि दीपक ने कहा कि वह केवल दोस्त की मदद कर रहा था। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और मामला दर्ज कर लिया। दीपक ने बताया कि पुलिस ने उसे समझाया और दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की हिदायत दी।
मोहम्मद दीपक का बयान: क्या कहा उस दिन के बारे में?
मोहम्मद दीपक ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने सिर्फ अपने दोस्त की रक्षा की। दुकान पर बजरंग दल के लोग आए और बिना वजह परेशान करने लगे। मैंने कहा कि अगर कोई समस्या है तो कानूनी तरीके से हल करें, लेकिन वे नहीं माने। मैंने दोस्त को बचाने के लिए आवाज उठाई, मारपीट नहीं की। पुलिस आई तो सब शांत हो गया।” दीपक ने जोर देकर कहा कि यह दोस्ती का मामला है, न कि धार्मिक। उन्होंने अपील की कि ऐसे मामलों में सद्भाव बनाए रखा जाए।
सामाजिक प्रभाव और प्रतिक्रिया
यह घटना कोटद्वार में धार्मिक सद्भाव पर सवाल खड़े कर रही है।
एक तरफ लोग दीपक की दोस्ती की तारीफ कर रहे हैं,
तो दूसरी तरफ कुछ लोग इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर कई लोग दोनों पक्षों को समझाने में लगे हैं।
पुलिस ने कहा है कि मामला जांच के दायरे में है और
किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से बचा जाए।
दोस्ती या विवाद?
कोटद्वार की इस घटना से एक बार फिर साबित होता है कि दोस्ती धार्मिक सीमाओं से ऊपर होती है,
लेकिन छोटी-छोटी बातें विवाद में बदल सकती हैं।
मोहम्मद दीपक ने मुस्लिम दोस्त की दुकान बचाने के लिए बजरंग दल से भिड़ने का सच बताया है।
उम्मीद है कि पुलिस जांच निष्पक्ष होगी और दोनों पक्षों में सद्भाव बना रहेगा।
ऐसे मामलों में संवाद और समझदारी सबसे जरूरी है ताकि छोटी बातें बड़े विवाद न बनें।