खिचड़ी मेला
गोरखनाथ मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर शुरू होने वाला खिचड़ी मेला वर्षों से आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। गोरखनाथ जी को खिचड़ी चढ़ाने के लिए लाखों भक्त यहां पहुंचते हैं। माना जाता है कि इस दिन यहां खिचड़ी चढ़ाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
यह मेला केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मिलन का भी बड़ा केंद्र है, जहां दूर-दूर से लोग उत्साह के साथ आते हैं।
फूलों से बने आकर्षक सेल्फी पॉइंट – इस बार की खास तैयारी
इस वर्ष गोरखनाथ मंदिर प्रशासन ने मेले को आधुनिक अंदाज़ देने के लिए कई आकर्षक सेल्फी पॉइंट तैयार किए हैं। इनकी खासियतें:
- ताज़े फूलों से सजावट – गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा और ऑर्किड जैसे फूलों का विशेष प्रयोग
- नैचुरल ग्रीन डेकोरेशन – पौधों और लाइटिंग के साथ फोटो फ्रेंडली डिजाइन
- थीम आधारित बैकड्रॉप – जैसे ‘जय गुरु गोरखनाथ’, ‘खिचड़ी मेला 2025’, ‘आस्था पथ’
- LED लाइट इफेक्ट – रात में चमकते हुए स्टाइलिश फोटो स्पॉट
इन सेल्फी पॉइंट्स पर लोग दिनभर फोटो क्लिक करते दिखाई देंगे, जिससे सोशल मीडिया पर भी मेले की रौनक और बढ़ेगी।
फूल और रंगीन कपड़ों से होगी विशेष सजावट
मेले की पूरी थीम इस बार फूलों और पारंपरिक कपड़ों पर आधारित है। मंदिर के मुख्य द्वार, गलियारों, प्रवेश मार्ग, टेंट और दुकानों को रंगीन कपड़ों और फूल मालाओं से सजाया जा रहा है।
मुख्य आकर्षण:
- मंदिर के प्रवेश द्वार पर भव्य फ्लोरल गेट
- आस-पास के परिसर में रंगीन झूमर और हल्के कपड़ों की लहराती सजावट
- आस्था पथ पर फूलों की आकर्षक कतारें
- मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए विशेष फ्लोरल डेकोरेशन
यह मनमोहक सजावट सिर्फ दर्शकों को आकर्षित ही नहीं करती, बल्कि पूरे मेले को एक त्योहार जैसा भव्य रूप प्रदान करती है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोक कला का संगम
खिचड़ी मेले में परंपरागत सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे:
- लोकनृत्य
- भजन-कीर्तन
- नाटक व लोकगीत
- क्षेत्रीय कलाकारों की विशेष प्रस्तुतियाँ
इन कार्यक्रमों में स्थानीय संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिलती है।
सुरक्षा और सुविधाएँ
भीड़ को ध्यान में रखकर प्रशासन ने:
- विशेष सुरक्षा व्यवस्था
- अलग-अलग पार्किंग ज़ोन
- साफ-सफाई के लिए टीम
- निशुल्क पानी और प्राथमिक उपचार केंद्र
जैसी सुविधाएँ भी सुनिश्चित की हैं।