देवरिया जिले में पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। लंबे समय से फरार चल रहे 2023 सिपाही हत्याकांड के मुख्य आरोपी शराब तस्कर शैलेंद्र यादव को आखिरकार खामपार पुलिस ने दबोच लिया। यह गिरफ्तारी 13 जनवरी 2026 को हुई, जो जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। पुलिस की इस सनसनीखेज कार्रवाई ने न केवल पुराने मामले को नई दिशा दी है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब माफिया पर नकेल कसने का संदेश भी दिया है।
गिरफ्तारी की पूरी घटना
खामपार थाना क्षेत्र के भिंगारी बाजार चौकी प्रभारी की टीम ने थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार अस्थाना और उपनिरीक्षक अनित कुमार राय के नेतृत्व में यह सफल ऑपरेशन किया। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने भिंगारी बाजार के पास चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान एक संदिग्ध स्कॉर्पियो गाड़ी को रोका गया। जांच में पता चला कि गाड़ी में फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई है और इसमें 10 पेटी अवैध देशी शराब भरी हुई है।
गाड़ी में सवार चार लोगों को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया। इनमें मुख्य आरोपी शैलेंद्र यादव के अलावा बिहार के तीन अन्य शराब तस्कर शामिल हैं। शैलेंद्र यादव पर 2023 में हुए सिपाही हत्याकांड का मुख्य आरोप है। पुलिस ने स्कॉर्पियो गाड़ी और सभी 10 पेटी शराब को जब्त कर लिया। आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
2023 सिपाही हत्याकांड की याद
यह गिरफ्तारी हमें 2023 के उस दर्दनाक हत्याकांड की याद दिलाती है, जब देवरिया जिले में शराब तस्करों ने पुलिस चेकिंग के दौरान एक सिपाही की जान ले ली थी। तस्कर स्कॉर्पियो गाड़ी से भागने की कोशिश में सिपाही को रौंदते हुए फरार हो गए थे। इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश में पुलिस बल के मनोबल को प्रभावित किया था। मुख्य आरोपी शैलेंद्र यादव उस समय से फरार चल रहा था और शराब तस्करी का धंधा जारी रखे हुए था।
पुलिस ने उस समय कई आरोपियों को पकड़ा था, लेकिन शैलेंद्र यादव हाथ नहीं आया। अब उसकी गिरफ्तारी से मामले में नई उम्मीद जगी है। पुलिस पूछताछ में शैलेंद्र से हत्याकांड के बाकी राज उगलवाने की कोशिश कर रही है। संभव है कि उसके बयानों से गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंच बन सके।
पुलिस की सक्रियता और भविष्य की योजनाएं
खामपार पुलिस की यह कार्रवाई देवरिया जिले में योगी सरकार के सख्त निर्देशों का नतीजा है। उत्तर प्रदेश में अवैध शराब तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए लगातार चेकिंग और छापेमारी हो रही है। खासकर बिहार बॉर्डर से सटे इलाकों में पुलिस अलर्ट मोड पर है। थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार अस्थाना ने बताया कि टीम ने सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य जिले को शराब माफिया मुक्त बनाना है।”
यह गिरफ्तारी न केवल 2023 के पुराने मामले को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण है
, बल्कि अवैध शराब की सप्लाई चेन को तोड़ने में भी मदद करेगी।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है कि यह शराब कहां से आई और कहां सप्लाई होने वाली थी।
फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल बताता है कि तस्कर कितने संगठित तरीके से काम कर रहे थे।
समाज पर प्रभाव और सबक
ऐसी घटनाएं समाज को यह संदेश देती हैं कि कानून से कोई बड़ा नहीं है।
शराब तस्करी न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है,
बल्कि इससे जुड़े अपराध पुलिस और आम जनता दोनों के लिए खतरा बनते हैं।
देवरिया जैसे सीमावर्ती जिलों में बिहार से शराब की तस्करी आम समस्या है।
पुलिस की इस सफलता से स्थानीय लोगों में राहत की लहर है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब रात में शराब तस्करों का डर कम होगा।
पुलिस अधीक्षक देवरिया ने टीम को बधाई दी है और ऐसे ऑपरेशन जारी रखने का आदेश दिया है।
आने वाले दिनों में और बड़ी कार्रवाइयां होने की संभावना है।
निष्कर्ष के तौर पर, शैलेंद्र यादव की गिरफ्तारी न्याय की जीत है। यह पुलिस की मुस्तैदी का प्रमाण है
कि फरार आरोपी कितने भी साल क्यों न भागे, आखिरकार कानून के हत्थे चढ़ ही जाते हैं।
देवरिया पुलिस को इस कामयाबी के लिए सलाम!
