करणी सेना ने संजय निषाद की जीभ काटने पर 5.51 लाख का इनाम घोषित किया: बलिया विवाद ने मचाई सियासी हंगामा
मेटा डिस्क्रिप्शन: यूपी के मंत्री संजय निषाद के बलिया वाले बयान पर करणी सेना का विवादास्पद ऐलान। जिले के इतिहास को अपमानित करने के आरोप में 5.51 लाख का इनाम घोषित। जानें पूरी घटना, प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक प्रभाव।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हिंसक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। बलिया जिले में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के एक बयान ने हंगामा मचा दिया है। करणी सेना के जिला अध्यक्ष कमलेश सिंह ने मंत्री की जीभ काटकर लाने वाले को 5.51 लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। यह घटना 2 दिसंबर 2025 को सामने आई, जब कमलेश सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में यह ऐलान किया। संजय निषाद के बयान को बलिया के गौरवपूर्ण इतिहास का अपमान बताते हुए उन्होंने कहा कि मंगल पांडे की धरती पर ऐसी विकृत मानसिकता वाले बयान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। आइए, इस विवाद की गहराई में उतरें और समझें कि यह कैसे यूपी की सियासत को प्रभावित कर सकता है।
संजय निषाद का विवादित बयान: बलिया को ‘दलालों की भूमि’ बताया
विवाद की जड़ 29 नवंबर 2025 को बांसडीह में निषाद पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में संजय निषाद का दिया गया बयान है। वायरल वीडियो में मंत्री निषाद कहते नजर आ रहे हैं, “यह बलिया है, यहां के लोग अंग्रेजों के दलाल थे। और दलाली का सिस्टम अभी भी चलता है। इसलिए बलिया भी बर्बाद है।” इस बयान को बलिया के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का अपमान माना गया। बलिया को क्रांतिकारी मंगल पांडे की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने 1857 की क्रांति का बिगुल फूंका था। जिले को ‘विद्रोह की भूमि’ कहा जाता है, जहां ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहली हथियारबंद विद्रोह हुआ।
निषाद का यह बयान विधानसभा चुनावों की तैयारी के संदर्भ में आया, जहां उन्होंने स्थानीय मुद्दों पर बोलते हुए विकास और भ्रष्टाचार पर तंज कसा। लेकिन विपक्ष और स्थानीय संगठनों ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी बताया। सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी ने कहा, “मंत्री को पहले ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। बलिया भारत के पहले स्वतंत्र जिलों में से एक था।” इस बयान के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर #BoycottSanjayNishad जैसे ट्रेंड चल पड़े।
करणी सेना की धमकी: 5.51 लाख का इनाम और कानूनी मदद का वादा
2 दिसंबर को बलिया में करणी सेना के जिला अध्यक्ष कमलेश सिंह ने पत्रकारों से कहा, “संजय निषाद का बयान उनकी विकृत मानसिकता को दर्शाता है। बलिया मंगल पांडे की धरती है, जहां क्रांति का बिगुल बजा था। मैं किसी को भी जो उनकी जीभ काटकर लाएगा, उसे 5 लाख 51 हजार रुपये का इनाम दूंगा।” उन्होंने आगे कहा कि यदि वे खुद न कर पाएं, तो बलिया के युवाओं से अपील करेंगे और इनाम के साथ-साथ कानूनी लड़ाई में भी मदद करेंगे।
यह पहली बार नहीं है जब करणी सेना ने ऐसे विवादास्पद ऐलान किए हैं। पहले ‘तांडव’ वेबसीरीज और राणा सांगा पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन के बयान पर भी उन्होंने जीभ काटने का इनाम घोषित किया था। इस बार का ऐलान यूपी में राजपूत-निषाद समुदायों के बीच तनाव को बढ़ा सकता है। करणी सेना, जो मुख्य रूप से राजपूत संगठन है, ने बलिया में विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: कांग्रेस की शिकायत, बीजेपी की चुप्पी
इस घटना पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं तेज हैं। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष उमाशंकर पाठक
ने बांसडीह कोतवाली में मंत्री निषाद के खिलाफ एफआईआर की मांग की। उन्होंने बताया
कि 72 घंटे बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर शिकायत दर्ज कराई गई।
कांग्रेस ने बलिया शहर में मंत्री का पुतला भी दफनाया।
सपा ने इसे बीजेपी सरकार की ‘गठबंधन राजनीति’ का हिस्सा बताया
, जहां निषाद पार्टी को सांत्वना के लिए ऐसा बयानबाजी करने दी जाती है।
बीजेपी और निषाद पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व इस मुद्दे पर विचार कर रहा है।
यूपी में 2027 विधानसभा चुनावों को देखते हुए
यह विवाद गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है
कि बलिया जैसे सीमांत क्षेत्रों में जातिगत समीकरण बिगड़ने से विपक्ष को फायदा हो सकता है।
सियासी निहितार्थ: हिंसा की भाषा पर सवाल
यह घटना यूपी की राजनीति में हिंसक बयानबाजी के बढ़ते चलन को उजागर करती है।
करणी सेना जैसे संगठनों की धमकियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं।
कानूनी विशेषज्ञों ने इसे आईपीसी की धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत अपराध बताया है।
पुलिस ने कमलेश सिंह के बयान पर एफआईआर दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह विवाद सुलझेगा या 2027 चुनावों तक तनाव बरकरार रहेगा?
