गोरखपुर को मिलने वाला है पूर्वांचल का सबसे भव्य कान्हा उपवन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट “कान्हा उपवन एवं गौ-अभयारण्य” अब तेजी से हकीकत का रूप ले रहा है। गोरखपुर शहर से मात्र 18 किमी दूर ताल नदौर (रामगढ़ ताल क्षेत्र) में फैले 108 एकड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 125 करोड़ रुपये की लागत वाला यह उपवन न सिर्फ देश का सबसे बड़ा गौ-अभयारण्य होगा, बल्कि इको-टूरिज्म का नया केंद्र भी बनेगा।
प्रोजेक्ट की प्रमुख विशेषताएं: क्या-क्या होगा खास?
- 108 एकड़ में फैला पूरा परिसर, जिसमें 70 एकड़ में गौशाला और 38 एकड़ में टूरिज्म जोन
- 5000+ गोवंश की क्षमता वाली आधुनिक कान्हा गौशाला (फिलहाल 1200 से ज्यादा गायें मौजूद)
- बोटिंग और वॉटर स्पोर्ट्स के लिए रामगढ़ ताल का सौंदर्यीकरण
- जंगल सफारी, चिल्ड्रन पार्क, बटरफ्लाई पार्क और हर्बल गार्डन
- 5 किमी लंबा वॉक-वे, जॉगिंग ट्रैक और साइकिल ट्रैक
- फूड कोर्ट, रेस्तरां, ओपन एयर थिएटर और योग सेंटर
- सौर ऊर्जा से रोशन पूरा परिसर – 100% ग्रीन एनर्जी
- गोबर से बायोगैस प्लांट और जैविक खाद उत्पादन इकाई
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक 68% काम पूरा हो चुका है। गौशाला का मुख्य भवन, गोबर गैस प्लांट और बोटिंग जेट्टी तैयार हो चुकी है। मार्च 2026 तक बाकी बचे लैंडस्केपिंग और टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरा कर लिया जाएगा।
कान्हा गौशाला: सड़क पर लावारिस गोवंश का अंतिम ठिकाना
योगी सरकार की गो-संरक्षण नीति का यह सबसे बड़ा मॉडल है। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज सहित पूरे पूर्वांचल से सड़कों पर घूमने वाली लावारिस गायों को यहीं लाया जा रहा है। अभी तक 1200 से ज्यादा गोवंश को शरण दी जा चुकी है। हर गाय पर चिप लगाकर उसकी हेल्थ और ब्रिड की मॉनिटरिंग की जा रही है। गौशाला में रोजाना 25 टन गोबर से बायोगैस और जैविक खाद बन रही है, जिसे स्थानीय किसानों को सब्सिडी दर पर बांटा जा रहा है।
इको-टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट: वीकेंड डेस्टिनेशन बनेगा ताल नदौर
गोरखपुर और आसपास के जिलों के लोगों के लिए कान्हा उपवन वीकेंड गेटअवे बनेगा। सुबह-शाम बोटिंग, बच्चों के लिए जंगल सफारी, शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम – सब कुछ एक ही जगह। रामगढ़ ताल का पानी साफ किया जा रहा है, किनारे पर वॉक-वे और लाइटिंग की जा रही है।
