बरेली में फसल बीमा
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के नाम पर एक ऐसा मजाक हुआ है, जिसने किसानों के विश्वास को तहस-नहस कर दिया। 2025 की बरसात में आई बाढ़ ने हजारों एकड़ फसल बर्बाद कर दी, लेकिन जब क्लेम का समय आया तो इंश्योरेंस कंपनी ने किसानों को मात्र 2.72 रुपये, 3.76 रुपये या अधिकतम 50-100 रुपये की राशि दी। एक किसान बाबूराम को तो सिर्फ 2.72 रुपये का क्लेम मिला, जबकि कंपनी ने जिले से 9.5 करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा किया। यह मामला अब सोशल मीडिया और स्थानीय समाचारों में खूब चर्चा में है और किसानों में गहरा आक्रोश है।
हादसा और क्लेम की हकीकत
2025 की मानसून में बरेली के कई इलाकों – जैसे बिझौला, फरीदपुर, नवाबगंज, मीठापुर और शाहजहांपुर बॉर्डर क्षेत्र – में भारी बाढ़ आई। धान, गन्ना, सब्जियां और अन्य फसलें पानी में डूब गईं। किसानों ने तुरंत फसल बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। प्रीमियम कटौती बैंक खाते से हो चुकी थी और सर्वे भी हुआ था। लेकिन जब क्लेम की राशि आई तो किसान स्तब्ध रह गए।
- बाबूराम (मीठापुर गांव) – 2.72 रुपये
- रामदास (फरीदपुर) – 3.76 रुपये
- कई अन्य किसानों को 10-50 रुपये के बीच राशि मिली
- ज्यादातर मामलों में 100 रुपये से कम क्लेम
किसानों का कहना है कि फसल का नुकसान 80-90% तक हुआ था, लेकिन क्लेम की राशि हास्यास्पद है। एक किसान ने कहा, “इतने पैसे से तो चाय भी नहीं पी जा सकती। यह बीमा नहीं, मजाक है।”
कंपनी ने कमाए 9.5 करोड़
बरेली जिले में 2025 के खरीफ सीजन में लगभग 1.2 लाख किसानों ने फसल बीमा कराया। कुल प्रीमियम राशि करीब 9.5 करोड़ रुपये रही, जिसमें किसानों का हिस्सा और सरकार की सब्सिडी शामिल है। इंश्योरेंस कंपनी (जिसका नाम अभी तक आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया, लेकिन स्थानीय स्तर पर SBI जनरल और अन्य कंपनियां सक्रिय हैं) ने प्रीमियम जमा कर लिया, लेकिन क्लेम देने में टालमटोल बरती। किसानों का आरोप है कि सर्वे में जानबूझकर नुकसान कम दिखाया गया या डेटा में गड़बड़ी की गई।
किसानों का गुस्सा और प्रतिक्रिया
यह मामला सामने आने के बाद बरेली में किसान संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए। भारतीय किसान यूनियन (BKU) और अन्य संगठनों ने कहा कि यह योजना किसानों की मदद के लिए नहीं, बल्कि कंपनियों को मुनाफा कमाने का जरिया बन गई है। सोशल मीडिया पर #FasalBimaMajak और #BareillyKisan जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई किसानों ने वीडियो पोस्ट कर अपनी क्लेम राशि दिखाई और सरकार से जांच की मांग की।
जिला प्रशासन ने कहा है कि मामला जांच के अधीन है। डीएम ने इंश्योरेंस कंपनी को नोटिस जारी किया है
और क्लेम प्रक्रिया की समीक्षा का आदेश दिया है।
लेकिन किसानों का कहना है कि जांच के नाम पर समय बर्बाद किया जा रहा है।
योजना की कमियां और सुझाव
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2016 में शुरू हुई थी, लेकिन कई राज्यों में इसकी क्रियान्वयन में कमी रही है।
बरेली का मामला इसकी सबसे बड़ी मिसाल है।
किसानों का कहना है कि सर्वे में पारदर्शिता नहीं है, ड्रोन सर्वे का
इस्तेमाल नहीं होता और क्लेम वितरण में देरी होती है। सुझाव दिए जा रहे हैं कि
क्लेम राशि न्यूनतम 5000-10000 रुपये से कम न हो और कंपनी पर सख्त कार्रवाई हो।
