नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कुछ छात्रों को कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते देखा गया है। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया है और जेएनयू प्रशासन ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए जांच और कड़ी कार्रवाई का ऐलान किया है।
जेएनयू प्रशासन का सख्त बयान
मंगलवार (6 जनवरी 2026) देर शाम जेएनयू प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी किया। बयान में कहा गया कि संवैधानिक पदों और केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ अभद्र एवं भड़काऊ नारेबाजी विश्वविद्यालय की गरिमा के विरुद्ध है। प्रशासन ने स्पष्ट किया:
“हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थक हैं, लेकिन व्यक्तिगत या संवैधानिक पदों के प्रति अपमानजनक व्यवहार किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। इस मामले में जांच टीम गठित की गई है। दोष सिद्ध होने पर संबंधित छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निष्कासन भी शामिल हो सकता है।”
प्रशासन का कहना है कि ऐसी गतिविधियां संस्थान की छवि को धूमिल करती हैं और कैम्पस में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर #JNUAntiNational और #SaveJNU जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। भाजपा समर्थकों और दक्षिणपंथी यूजर्स ने इसे ‘देशविरोधी गतिविधि’ करार देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की। कई यूजर्स ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि जेएनयू में ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ फिर सक्रिय हो गया है।
वहीं, वामपंथी और विपक्षी खेमे ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। एक पूर्व जेएनयू छात्र नेता ने लिखा, “कैंपस में राजनीतिक बहस और असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है। हर विरोध को देशद्रोह से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।”
छात्र संगठनों में बंटवारा
कैंपस के छात्र संगठनों में भी इस मुद्दे पर गहरी विभाजन की लकीर दिख रही है:
- JNUSU (जेएनयू छात्र संघ): वामपंथी छात्र संगठनों के गठबंधन वाला JNUSU ने प्रशासन के बयान को “हड़बड़ी में लिया गया फैसला” बताया। संघ ने मांग की कि पहले वीडियो की प्रामाणिकता की जांच हो, क्योंकि इसमें एडिटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
- JNUSU ने छात्रों की एकजुटता की अपील की और कहा
- कि यह मामला राजनीतिक दबाव में लिया गया कदम है।
- ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद): भाजपा से संबद्ध ABVP ने प्रशासन के कदम का स्वागत किया
- और दोषी छात्रों के खिलाफ तुरंत निष्कासन की मांग की। ABVP ने बयान में कहा, “
- देशविरोधी और अपमानजनक नारेबाजी को जेएनयू जैसे संस्थान में जगह नहीं मिलनी चाहिए।
- ऐसे तत्वों को कैंपस से बाहर करना जरूरी है।”
पृष्ठभूमि: 2016 का विवाद फिर याद आया
यह पहली बार नहीं है जब जेएनयू नारेबाजी को लेकर विवादों में घिरा हो।
2016 में अफजल गुरु की फांसी के विरोध में कथित देशविरोधी नारों के मामले में
कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत कई छात्रों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ था।
उस घटना ने पूरे देश में राजनीतिक बहस छेड़ दी थी और
जेएनयू को ‘एंटी-नेशनल’ का ठप्पा लगाने की कोशिश हुई थी।
वर्तमान विवाद भी उसी घटनाक्रम की याद ताजा कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है
कि यह मामला आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण का हिस्सा बन सकता है।
