परिचय: ISRO की 2026 की पहली उड़ान
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62 मिशन के साथ नए साल की शानदार शुरुआत की। यह मिशन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से सुबह 10:17-10:18 बजे लॉन्च किया गया। PSLV का यह 64वां उड़ान था और DL वेरिएंट का 5वां प्रक्षेपण, जिसमें दो स्ट्रैप-ऑन बूस्टर शामिल थे।
यह NSIL (NewSpace India Limited) द्वारा संचालित 9वां समर्पित कमर्शियल मिशन था, जिसमें मुख्य पेलोड EOS-N1 (अन्वेषा) hyperspectral अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट था। हालांकि, थर्ड स्टेज (PS3) के अंत में अनियमितता (deviation in flight path और roll rates disturbance) देखी गई, जिसके कारण सैटेलाइट्स इंटेंडेड ऑर्बिट में नहीं पहुंचे। ISRO ने डेटा एनालिसिस शुरू कर दिया है।
मुख्य पेलोड: EOS-N1 (अन्वेषा) सैटेलाइट
EOS-N1, जिसे अन्वेषा भी कहा जाता है, DRDO द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक hyperspectral इमेजिंग सैटेलाइट है। यह सैटेलाइट सैकड़ों वेवलेंथ्स में इमेज कैप्चर कर सकती है, जिससे सामग्री की पहचान (जैसे मिट्टी, वनस्पति, खनिज) आसानी से हो सकती है।
उद्देश्य:
- रणनीतिक टोही और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करना
- कृषि मॉनिटरिंग (फसल स्वास्थ्य, मिट्टी विश्लेषण)
- शहरी मानचित्रण और पर्यावरण निगरानी
- आपदा प्रबंधन में सहायता
यह सूर्य-समकालिक ऑर्बिट (लगभग 505 km) में प्लेस होने वाला था, जहां से यह भारत की “आंखों में आंख” की तरह काम करता। यह DRDO का महत्वपूर्ण स्ट्रैटेजिक प्रोजेक्ट था, जो बॉर्डर सर्विलांस और दुश्मन गतिविधियों की ट्रैकिंग में मदद करता।
को-पैसेंजर सैटेलाइट्स और अन्य पेलोड
मिशन में 14-15 को-पैसेंजर सैटेलाइट्स (कुल वजन ~200 kg) शामिल थे, जो भारत, नेपाल, थाईलैंड, स्पेन, फ्रांस, ब्राजील, UK आदि से थे। इनमें शामिल थे:
- भारतीय स्टार्टअप्स जैसे Dhruva Space, OrbitAID (AayulSAT – दुनिया का पहला छोटा सैटेलाइट डॉकिंग टेस्ट)
- IoT, AI प्रोसेसिंग, रेडिएशन स्टडीज, कम्युनिकेशन आदि के लिए CubeSats
- यूरोपीय KID री-एंट्री कैप्सूल (controlled re-entry टेस्ट)
यह मिशन भारत के प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम को बूस्ट देने वाला था।
लॉन्च का महत्व और चुनौतियां
PSLV-C62 PSLV का “वर्कहॉर्स” होने का प्रमाण था, जो Chandrayaan-1, Mangalyaan, Aditya-L1 जैसी मिशन्स सफलतापूर्वक कर चुका है। 2025 में PSLV-C61 की असफलता के बाद यह रिटर्न-टू-फ्लाइट मिशन था। लॉन्च से पहले 22.5 घंटे का काउंटडाउन और अच्छा मौसम रहा।
लेकिन थर्ड स्टेज में समस्या (2025 की तरह) ने मिशन को प्रभावित किया। ISRO चेयरमैन V Narayanan ने कहा,
“हम डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं और जल्द अपडेट देंगे।” यह PSLV के लिए लगातार दूसरी असफलता है,
जो विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।
निष्कर्ष
PSLV-C62 ने 2026 की शुरुआत रोमांचक तरीके से की, लेकिन अनियमितता ने
EOS-N1 (अन्वेषा) और अन्य सैटेलाइट्स को ऑर्बिट में नहीं पहुंचाया।
ISRO की टीम जल्द कारण पता लगाकर सुधार करेगी।
यह मिशन भारत की स्पेस क्षमताओं, DRDO की टेक्नोलॉजी और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को दर्शाता है।
भविष्य में ऐसे hyperspectral सैटेलाइट्स भारत की सुरक्षा और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।