इजरायल-ईरान युद्ध 2026 का असर
इजरायल-ईरान युद्ध (2026) अब सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की फार्मा इंडस्ट्री पर गहरा असर डाल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने और शिपिंग रूट्स प्रभावित होने से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और की स्टार्टिंग मटेरियल्स (KSM) की कीमतें 20-40% तक बढ़ गई हैं। मेरठ जैसे फार्मा हब में पैरासिटामॉल, डाइक्लोफेनाक सोडियम, मोंटेलुकास्ट सोडियम और अन्य दवाओं के साल्ट महंगे हो गए हैं, जिससे दवा उत्पादन पर संकट मंडरा रहा है। इंडस्ट्री एक्जीक्यूटिव्स के अनुसार, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से चीन से API आयात में फ्रेट कॉस्ट दोगुनी (1200 से 2400 डॉलर प्रति कंटेनर) और शिपिंग कंपनियों के गल्फ रूट्स से इनकार के कारण है।
युद्ध से API और KSM की कीमतों में उछाल
युद्ध शुरू होने के बाद (फरवरी 2026 से) पैरासिटामॉल API की कीमत 26% बढ़ गई है, जबकि ग्लिसरीन 64% महंगा हो गया। अन्य सामान्य दवाओं जैसे ओमेप्राजोल, डाइक्लोफेनाक और ऑर्निडाजोल के साल्ट भी 20-30% महंगे हुए हैं। मेरठ में फार्मा उद्यमियों ने बताया कि एपीआई उत्पादकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने पुराने ऑर्डर रद्द कर नए ऊंचे दाम पर देने को कहा है। यह बढ़ोतरी पेट्रोकेमिकल्स से बने सॉल्वेंट्स (20-30% महंगे) और क्रूड ऑयल की अस्थिरता से जुड़ी है। इंडस्ट्री का अनुमान है कि अगर युद्ध मार्च तक चला तो दवा कीमतों में 10-20% तक उछाल आ सकता है।
मेरठ फार्मा इंडस्ट्री पर गहरा असर
मेरठ उत्तर प्रदेश का प्रमुख फार्मा हब है, जहां हजारों छोटे-मध्यम उद्यम पैरासिटामॉल और जेनेरिक दवाएं बनाते हैं। यहां API की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ गई है। कई मैन्युफैक्चरर्स ने कहा कि हाई-वॉल्यूम, लो-वैल्यू प्रोडक्ट्स (जैसे पैरासिटामॉल) में फ्रेट कॉस्ट ($6-7 प्रति किलो) सहन नहीं हो पा रही, जिससे एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है। डिस्ट्रीब्यूटर्स पुराने रेट्स पर सामान देने से इनकार कर रहे हैं, जिससे स्टॉक आउट की आशंका बढ़ गई है। फार्मा एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (Pharmexcil) के अनुसार, गल्फ और वेस्ट एशिया में एक्सपोर्ट्स ($300-500 मिलियन तक) प्रभावित हो सकते हैं।
कारण: होर्मुज बंद और ग्लोबल सप्लाई चेन डिसरप्शन
ईरान की जवाबी कार्रवाई से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ीं और शिपिंग रूट्स असुरक्षित हो गए। भारत API का बड़ा हिस्सा चीन से आयात करता है, जहां फ्रेट चार्जेस दोगुने हो गए। शिपिंग कंपनियां गल्फ हब्स से इनकार कर रही हैं या
$3500-5000 सरचार्ज लगा रही हैं। यह डिसरप्शन तापमान-सेंसिटिव दवाओं के लिए और खतरनाक है।
इंडस्ट्री का कहना है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो दवा महंगाई से आम आदमी प्रभावित होगा।
फार्मा इंडस्ट्री की चिंता और संभावित समाधान
फार्मा एक्सपोर्ट्स पर $300-500 मिलियन (₹2500-4500 करोड़) का नुकसान होने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार वैकल्पिक रूट्स (एयर कार्गो या अन्य पोर्ट्स) बढ़ाए,
लोकल API प्रोडक्शन को बढ़ावा दे और इम्पोर्ट ड्यूटी में राहत दे।
फिलहाल दवा कंपनियां लागत बढ़ोतरी को कंज्यूमर्स तक पास करने की तैयारी में हैं।
इजरायल-ईरान युद्ध अब भारत की फार्मा इंडस्ट्री और आम आदमी की जेब पर असर डाल रहा है। पैरासिटामॉल
जैसे बेसिक दवाओं के साल्ट 20-40% महंगे होने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। सरकार को जल्द हस्तक्षेप कर
सप्लाई चेन स्थिर करनी होगी, वरना दवा महंगाई एक बड़ा संकट बन सकती है।
