ईरान-इज़राइल युद्ध: मध्य-पूर्व में बढ़ता सैन्य टकराव
मध्य-पूर्व में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब खुले युद्ध का रूप ले चुका है। यह संघर्ष कई वर्षों से धीरे-धीरे बढ़ रहा था, लेकिन 2026 में हालात बेहद गंभीर हो गए जब बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू हुए। 28 फरवरी 2026 को इज़राइल और अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के कई उच्च पदस्थ अधिकारी मारे गए और देश की सैन्य संरचना को बड़ा नुकसान पहुंचा।
इन हमलों के जवाब में ईरान ने इज़राइल के शहरों और अमेरिका के मध्य-पूर्व स्थित सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कई दिनों तक दोनों देशों के बीच लगातार हमले होते रहे जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। इज़राइल की मजबूत एयर डिफेंस प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ हमलों से नुकसान भी हुआ।
ईरान और इज़राइल युद्ध की पृष्ठभूमि
यह संघर्ष अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे कई दशकों की राजनीतिक दुश्मनी, परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की लड़ाई शामिल है। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से ईरान और इज़राइल के संबंध बेहद खराब हो गए और दोनों देश एक-दूसरे को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना इज़राइल की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इज़राइल का कहना है कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है तो इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। इसी कारण इज़राइल ने कई बार ईरान के परमाणु ठिकानों पर गुप्त और खुली कार्रवाई की है।
मिसाइल और ड्रोन हमले: युद्ध का नया रूप
2026 के युद्ध में अमेरिका की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। अमेरिका ने इज़राइल के साथ मिलकर ईरान के
कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए और अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी। इस संघर्ष ने पूरी दुनिया की
राजनीति को प्रभावित किया है और संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने युद्ध रोकने की अपील की है।
इस युद्ध का असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है। वैश्विक तेल बाजार,
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और हवाई यात्रा भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की
आशंका से दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है।
दुनिया की राजनीति और तेल बाजार पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो
इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर हो सकता है।
कई देशों ने अपने नागरिकों को मध्य-पूर्व की यात्रा से बचने की सलाह भी दी है।
मध्य-पूर्व की यह जंग आने वाले समय में और भी बड़ा रूप ले सकती है,
क्योंकि क्षेत्र में कई देशों के हित जुड़े हुए हैं।
इसलिए पूरी दुनिया की नजर इस युद्ध पर बनी हुई है।
यह संघर्ष न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को भी
नया मोड़ दे रहा है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते टकराव से शांति की अपील तेज हो गई है,
लेकिन फिलहाल युद्ध जारी है और आगे क्या होगा, यह देखना बाकी है।
