भारतीय रेलवे ने 2026 में एक नया अध्याय जोड़ा है – वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस, देश की पहली प्रीमियम सेमी-हाई स्पीड स्लीपर ट्रेन। 17 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदा टाउन से इसका उद्घाटन किया। यह ट्रेन हावड़ा (कोलकाता) और कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच चलती है, जो पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत को जोड़ती है। ट्रेन 972-1000 किमी का सफर 14-15 घंटे में पूरा करती है, जो पुरानी ट्रेनों से 3-4 घंटे कम है। यह पूरी तरह एयर-कंडीशन्ड है, जिसमें AC फर्स्ट क्लास, AC 2-टियर और AC 3-टियर कोच हैं। सुविधाओं में वाई-फाई, बायो-टॉयलेट, फूड कियोस्क, पावर बैकअप और आधुनिक सीटिंग शामिल हैं। ट्रेन सप्ताह में 6 दिन चलती है (बुधवार को छोड़कर कामाख्या से, गुरुवार को हावड़ा से)।
ट्रेन की प्रमुख विशेषताएं
वंदे भारत स्लीपर 16 कोच वाली है, जिसमें कुल 823 यात्री क्षमता है। यह सेमी-हाई स्पीड (औसत 130-160 किमी/घंटा) पर चलती है। यात्रियों को आरामदायक रात्रिकालीन यात्रा मिलती है, जिसमें बेहतर बेडिंग, LED लाइटिंग और एंटरटेनमेंट सिस्टम है। टिकट बुकिंग शुरू होते ही घंटों में सोल्ड आउट हो गई, जो इसकी लोकप्रियता दिखाती है। रेल मंत्रालय का लक्ष्य 2026 के अंत तक 12 ऐसी ट्रेनें लॉन्च करना है, जो 1000-1500 किमी के रूट्स पर चलेंगी।
रूट और बिहार में स्थिति
ट्रेन का रूट: कामाख्या से शाम 6:15 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह 8:15 बजे हावड़ा पहुंचती है। प्रमुख स्टॉपेज – रंगिया, न्यू बोंगाईगांव, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू कूच बिहार, न्यू जलपाईगुड़ी, मालदा टाउन, न्यू फरक्का, आजिमगंज, कटवा, नबद्वीप धाम, बांदेल आदि। बिहार में ट्रेन किशनगंज, बारसोई, मालदा के रास्ते गुजरती है, लेकिन कोई ठहराव नहीं है। रेलवे ने स्पष्ट किया कि तेज गति बनाए रखने के लिए स्टॉप्स न्यूनतम रखे गए हैं। पटना या मुजफ्फरपुर जैसे शहरों को भी शामिल नहीं किया गया, जबकि सीमांचल (पूर्णिया, कटिहार, जोगबनी, किशनगंज) के यात्रियों को सबसे ज्यादा निराशा हुई।
सीमांचल में ठहराव न होने के कारण
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर का मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्रा को तेज और आरामदायक बनाना है। औसत स्पीड 160 किमी/घंटा रखने के लिए केवल प्रमुख जंक्शनों पर रुकावट जरूरी है। सीमांचल में कटिहार बड़ा जंक्शन है, लेकिन ट्रेन यहां गुजरेगी, रुकेगी नहीं।
इससे यात्रियों को पश्चिम बंगाल (मालदा या न्यू जलपाईगुड़ी) जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ेगी।
क्षेत्र के लोग इसे अनदेखी मान रहे हैं, क्योंकि सीमांचल पूर्वोत्तर के लिए महत्वपूर्ण गेटवे है।
स्थानीय नेता और यात्री मांग कर रहे हैं कि कम से कम कटिहार या किशनगंज पर स्टॉपेज दिया जाए।
हालांकि, रेलवे का फोकस समय बचत और दक्षता पर है।
प्रभाव और भविष्य
यह फैसला सीमांचल के विकास को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि वंदे भारत जैसी
ट्रेनें आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं। बिहार के अन्य हिस्सों में
वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही हैं (जैसे जोगबनी-दानापुर), लेकिन स्लीपर वर्जन में क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया।
रेलवे 2026-27 तक और ट्रेनें लॉन्च करेगा, उम्मीद है