मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक कूटनीति को हिला दिया है। 9 मार्च 2026 को रूस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “अंतरराष्ट्रीय कानून अब खत्म हो चुका है”। ईरान-US जंग के बीच रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की P-5 देशों (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस) की आपात बैठक बुलाई है। यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों से उपजे संकट पर केंद्रित है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बयान ने दुनिया की नजरें खींच ली हैं, जहां JCPOA (संयुक्त व्यापक कार्य योजना) समझौते के उल्लंघन को अमेरिका का दोष बताया गया है।
ईरान-US जंग की पृष्ठभूमि: कैसे पहुंचा संकट यहां?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव दशकों पुराना है, लेकिन 2025 के अंत से यह युद्ध की कगार पर पहुंच गया। अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने मिसाइल दागी, जिसमें दर्जनों अमेरिकी सैनिक मारे गए। ईरान-US जंग ने तेल कीमतों को 20% ऊपर धकेल दिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। ईरान ने हूती विद्रोहियों को समर्थन बढ़ाया, जबकि अमेरिका ने नए प्रतिबंध लगाए। रूस ईरान समर्थन स्पष्ट है – मॉस्को ने S-400 मिसाइल सिस्टम दिए और संयुक्त अभ्यास किए। अमेरिकी हमलों को “आक्रामकता” बताते हुए रूस ने P-5 बैठक का प्रस्ताव रखा, जो 10 मार्च को न्यूयॉर्क में होगी।
रूस का गुस्सा: क्यों भड़का मॉस्को?
रूस को ईरान-US जंग से रणनीतिक फायदा है। ईरान रूस का प्रमुख तेल ग्राहक और हथियार खरीदार है। अमेरिकी प्रतिबंधों से रूस-ईरान व्यापार 30% बढ़ा। लावरोव ने अंतरराष्ट्रीय कानून खत्म का बयान देकर अमेरिका को चेतावनी दी कि रूस वीटो का इस्तेमाल करेगा। मध्य पूर्व संकट गहरा रहा है – इजराइल ने भी ईरान के ठिकानों पर हमले किए, जिससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ा। रूस का यह रुख UNSC में अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास है, जहां वह ईरान के पक्ष में खड़ा है।
P-5 बैठक का महत्व: क्या बदलेगा वैश्विक समीकरण?
P-5 बैठकें दुर्लभ होती हैं और बड़े संकटों में ही बुलाई जाती हैं, जैसे 2022 यूक्रेन युद्ध में। यहां रूस ईरान के पक्ष में प्रस्ताव लाएगा, जबकि अमेरिका ब्रिटेन-फ्रांस के साथ खड़ा रहेगा। चीन की भूमिका निर्णायक होगी, जो तटस्थ रहते हुए तेल आयात पर नजर रखेगा। UNSC P5 बैठक में अंतरराष्ट्रीय कानून की बहाली, ईरान पर प्रतिबंध हटाने और युद्धविराम पर चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक JCPOA को पुनर्जीवित कर सकती है, लेकिन विफल होने पर मध्य पूर्व संकट और गहरा सकता है। तेल $100 प्रति बैरल छू सकता है, जो वैश्विक महंगाई बढ़ाएगा।
संभावित परिणाम और भारत पर प्रभाव
P-5 बैठक विफल होने पर ईरान-US जंग और फैल सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होगा।
भारत के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि ईरान से 10% तेल आयात होता है।
महंगाई और ऊर्जा संकट बढ़ सकता है। पीएम मोदी ने शांति की अपील की है,
जबकि रूस-ईरान गठबंधन BRICS को मजबूत करेगा। भारत न्यूट्रल रहते हुए कूटनीति पर जोर दे रहा है। कुल मिलाकर
, यह घटना वैश्विक समीकरण बदल सकती है, जहां रूस-अमेरिका टकराव नया मोड़ लेगा।
निष्कर्ष ईरान-US जंग से भड़के रूस ने P-5 बैठक बुलाकर अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा का प्रयास किया है।
यह वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन तनाव कम होगा या बढ़ेगा,
यह बैठक पर निर्भर करेगा। दुनिया सांस थामे इंतजार कर रही है।
