मौसम हमारी दैनिक जिंदगी का एक अभिन्न अंग है। यह न केवल हमारे कपड़ों, भोजन और गतिविधियों को प्रभावित करता है, बल्कि कृषि, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। भारत जैसे विविध भौगोलिक क्षेत्र वाले देश में मौसम की विविधता देखने को मिलती है, जहां उत्तर में हिमालय की बर्फीली चोटियां, दक्षिण में उष्णकटिबंधीय वर्षा और पश्चिम में मरुस्थलीय गर्मी एक साथ मौजूद हैं। मौसम विज्ञान, जिसे मीटियरोलॉजी कहा जाता है, वायुमंडलीय दबाव, तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और वर्षा जैसे कारकों का अध्ययन करता है। आधुनिक तकनीक जैसे सैटेलाइट, रडार और कंप्यूटर मॉडल के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान अब काफी सटीक हो गया है, जो प्राकृतिक आपदाओं से बचाव में मदद करता है।
भारत का मौसम विज्ञान: मौलिक अवधारणाएं
भारत का मौसम 2026 में जलवायु परिवर्तन के कारण और अधिक अप्रत्याशित हो रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में गर्मी की लहरें 45 डिग्री तक पहुंच रही हैं, जबकि मानसून की देरी से किसानों को नुकसान हो रहा है। IMD के अनुसार, एल नीनो प्रभाव से सूखा बढ़ सकता है। 2026 में पूर्वानुमान से पता चलता है कि गर्मियां अधिक तीव्र होंगी, जबकि सर्दियां अनियमित कोहरे और ठंड से प्रभावित रहेंगी। जलवायु परिवर्तन से पश्चिमी विक्षोभ कमजोर हो रहे हैं, जिससे उत्तर भारत में सर्दियों की वर्षा घट रही है। यह लेख मौसम के प्रकार, पूर्वानुमान और बचाव टिप्स पर विस्तार से चर्चा करता है।
वाराणसी-UP मौसम पूर्वानुमान 2026: तापमान, कोहरा, मानसून | उत्तर प्रदेश वेदर अपडेट
उत्तर प्रदेश और वाराणसी का मौसम हमेशा से ही विविधतापूर्ण रहा है, जहां गंगा की गोद में बसे इस पवित्र शहर में सर्दियां ठंडी, गर्मियां तपिश भरी और मानसून उमस भरा रहता है। 23 जनवरी 2026 को वाराणसी में तापमान 9-23 डिग्री सेल्सियस के बीच है, कोहरे की चादर ने शहर को लपेट रखा है। UP में मौसम न केवल धार्मिक आयोजनों जैसे कुंभ या छठ को प्रभावित करता है, बल्कि कृषि, उद्योग और पर्यटन पर भी निर्भर करता है। IMD के अनुसार, इस साल जलवायु परिवर्तन से अनियमित वर्षा और गर्मी की लहरें बढ़ रही हैं। जनवरी में औसत तापमान 10-25°C रहा, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ से कुछ बारिश हुई।
वाराणसी-UP मौसम की विशेषताएं
उत्तर प्रदेश उत्तरी भारत का सबसे बड़ा राज्य है, जहां वाराणसी गंगा घाटी में स्थित होने से नमी युक्त मौसम का अनुभव करता है। सर्दियों (दिसंबर-फरवरी) में कोहरा और ठंड प्रमुख हैं। 2026 में जनवरी का औसत तापमान 10-25°C रहा, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ से बारिश हुई। गर्मियों (मार्च-जून) में लू चलती है,
तापमान 45°C तक पहुंच जाता है। मानसून (जुलाई-सितंबर) में
1000 मिमी से अधिक वर्षा होती है, जो बाढ़ का कारण बनती है।
जलवायु परिवर्तन से मौसम पैटर्न बदल रहे हैं—सर्दियां कम ठंडी और गर्मियां अधिक लंबी हो रही हैं।
एल नीनो 2026 में मानसून को प्रभावित कर सकता है, जिससे वर्षा कम या अनियमित हो सकती है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव और बचाव टिप्स
जलवायु परिवर्तन से भारत में चरम मौसम घटनाएं बढ़ रही हैं—गर्मी लहरें, बाढ़ और सूखा।
2026 में एल नीनो से गर्मियां कठिन हो सकती हैं। बचाव के लिए:
ठंड में गर्म कपड़े पहनें, कोहरे में सावधानी से ड्राइविंग करें,
गर्मी में हाइड्रेटेड रहें और मानसून में बाढ़ से सतर्क रहें। IMD ऐप और अलर्ट का उपयोग करें।